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बुधवार, 19 सितंबर 2018

वैकल्पिक ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत

पर्यावरण में ग्रीनहाउस गैस को बढ़ाने में कोयला से बनने वाली बिजली का सबसे अधिक योगदान है। लेकिन अब दुनिया में नई जागरूकता आई है। दुनिया भर में कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन का विकल्प तलाशा जा रहा है

पिछले साल पेरिस में हुए सीओपी21 सम्मेलन में दुनिया भर से अक्षय ऊर्जा के पैरोकारों का जमावड़ा दिखा। इस सम्मेलन में चाहे बिजनेस एक्जीक्यूटिव हों या राजनेता या फिर पर्यावरण से जुड़े कार्यकर्ता सभी ने एक सुर में 'सौ प्रतिशत अक्षय ऊर्जा’ को ही आगे बढ़ाने पर जोर दिया। अगर हाल में प्रकाशित अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संस्था (आईईए) की रिपोर्ट पर नज़र डालें तो उसमें भी यही संकेत मिलता है कि अक्षय ऊर्जा के सौ प्रतिशत लक्ष्य को पाने के लिए दुनिया सही दिशा की ओर अग्रसर है। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार पूरे मानव इतिहास में पहली बार ऊर्जा क्षमता के सबसे बड़े स्रोत के रूप में कोयला आधारित ऊर्जा के स्थान पर अक्षय ऊर्जा को जगह मिली है।        

एक संशोधित अनुमान के तहत 2021 तक 28 प्रतिशत बिजली उत्पादन की जिम्मेदारी अक्षय ऊर्जा की होगी। अक्षय ऊर्जा के बढ़ते प्रभाव और प्रसार को लेकर आईइए के कार्यकारी निदेशक फतीह बिरॉल ने कहा दूसरे क्षेत्रों की तरह ही हमलोग अक्षय ऊर्जा के नेतृत्व में वैश्विक ऊर्जा बाजार में हो रहे बदलाव का साक्षी बन रहे हैं। अक्षय ऊर्जा को लेकर सबसे ध्यानाकर्षक बात ये है कि यह विकासशील देशों की ओर उन्मुख है। अक्षय ऊर्जा के कुल उत्पादन क्षमता का 65 प्रतिशत चीन, अमेरिका, यूरोपीय संघ और भारत से आएगा। खास बात यह है कि सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलाने वालों में दुनिया में इन्हीं देशों का नाम भी शुमार है।



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