sulabh swatchh bharat

शनिवार, 20 अक्टूबर 2018

पढ़ाई से वंचितों के लिए नया पाठ

दो बच्चों के साथ शुरू हुआ सफर आज 300 बच्चों का कारवां बन चुका है

नोएडा के गेझा गांव की झुग्गी में रहने वाली महज छह साल की शिल्पी की अंग्रेजी की बेहतर समझ और सात साल की इन्दू के गणित के सवालों के फटाफट हल करने के तरीकों को देखकर बड़े-बड़े भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। ये दो बच्चे तो महज उदाहरण मात्र हैं। गेझा और उसके आसपास के गांव के ऐसे सौ से भी ज्यादा बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई में रुचि और विषयों पर उनकी शानदार पकड़ और ज्ञान सबको आश्चर्यचकित कर देता है। गरीब-मजदूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले इन बच्चों को पढ़ाई के लिए उत्साहित करने का बेहतरीन काम कर रहा है 'प्रोत्साहन’। जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा का दीपक जलाकर उनके भविष्य में उजाला लाने की ख्वाहिश लिए जिस 'प्रोत्साहन की शुरुआत अभय सिंह ने महज दो बच्चों के साथ की थी आज वह 300 से ज्यादा बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी बिखेर रहा है।

युवाओं के कमजोर स्किल्स

प्रोत्साहन के संस्थापक और संचालक अभय सिंह 35 वर्षों के अपने बैंकिंग कैरियर में कई तरह के अनुभवों से रू-ब-रू हुए। सेवा के अंतिम दिनों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में बतौर चीफ जनरल मैनेजर काम करने के दौरान प्रोबेशनरी ऑफिसरों की नियुक्ति के लिए होनेवाले कई इंटरव्यू में बतौर साक्षात्कारकर्ता तक शामिल हुए। वह अक्सर देखते थे कि ग्रामीण इलाकों और गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले युवाओं की कम्यूनिकेशन स्किल्स अच्छी नहीं होने की वजह से उनका चयन नहीं हो पाता था। लिखित परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले काफी युवा कमजोर अंग्रेजी और कम्यूनिकेशन स्किल्स की वजह से बेहतरीन मौका गंवा देते हैं। यह बात उनको काफी तकलीफ देती थी। उसी समय उन्होंने यह फैसला किया कि वह पिछड़े इलाके में रहने वाले गरीब बच्चों की अंग्रेजी और कम्यूनिकेशन स्किल्स को बेहतर बनाने के लिए कुछ करेंगे। अपनी इसी योजना को आगे बताते हुए उन्होंने बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी बिखेरने का फैसला किया।

अकेले चला था...

शिक्षा को जीवन का आधार मानने वाले अभय सिंह ने 6 अक्टूबर 2013 को नोएडा के गेझा गांव में 'प्रोत्साहन एक पाठशाला’ की शुरुआत की। महज दो बच्चों के साथ शुरू की गई इस पाठशाला को शुरुआती दिनों में वह अकेले ही संचालित करते थे। लेकिन धीरे-धीरे सिंह के प्रयासों और लोगों की जागरूकता की वजह से बच्चे और स्वयंसेवक इससे जुड़ते गए। आज इस पाठशाला से 300 से ज्यादा बच्चे जुड़े हैं। अभय सिंह के साथ-साथ इस पाठशाला में अब आस-पास की कुछ शिक्षित महिलाएं और पुरुष भी बेहतर समाज के निर्माण में अमूल्य योगदान दे रहे हैं। पेशे से इंजीनियर जगदीश प्रसाद अपना कीमती वक्त निकालकर इस पाठशाला में बच्चों को गणित पढ़ा रहे हैं वहीं कुछ गृहणियां और अन्य स्वयंसेवक अंग्रेजी, हिंदी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान जैसे विषय पढ़ाते हैं।

दो पालियों में मुफ्त शिक्षा

फिलहाल दो पालियों में इस पाठशाला का संचालन किया जा रहा है। सुबह के समय 9.30 से 12 बजे तक प्री नर्सरी के अबोध बच्चों को हाथ पकड़ कर लिखना और पढऩा सिखाया जा रहा है। इन बच्चों को इस बेहतरीन ट्रेनिंग देने के बाद इनका दाखिला आस-पास के स्कूलों में भी करवाया जाता है। वहीं शाम के समय दूसरी पाली में 3.30 से 6.30 बजे तक स्कूल में पढ़ाई करने वाले पहली से दसवीं कक्षा तक के बच्चों को उनकी पढ़ाई में मदद के लिए मुफ्त में शिक्षा दी जा रही है।

शिक्षा सबसे बड़ी सुरक्षा

अभय सिंह का मानना है कि किसी भी इंसान के लिए शिक्षा और रोजगार ही उसके जीवन के लिए सबसे बड़ी सुरक्षा है। अगर एक इंसान को कुछ पैसों से मदद की जाए तो वह कुछ समय के लिए होता है लेकिन अगर किसी इंसान को शिक्षित किया जाए तो वह उसके पूरे जीवन में काम आता है। एक शिक्षित इंसान कई अन्य लोगों को और समाज को शिक्षित कर सकता है।

इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए वह 'प्रोत्साहन’ के माध्यम से बच्चों को इस तरह की शिक्षा दे रहे हैं ताकि भविष्य में उनके लिए उपयोगी हो। सिर्फ किताबी ज्ञान से अलग हटकर वह अपनी पाठशाला में बच्चों के कम्यूनिकेशन स्किल्स और अन्य स्किल्स पर भी ध्यान दे रहे हैं। इसके साथ-साथ बच्चों को इन्वॉल्व रखने के लिए क्विज कंपिटिशन, स्पोर्ट्स, योग और साफ-सफाई जैसी कई तरह की एक्टिविटी भी समय-समय पर कराते रहते हैं। मुफ्त में शिक्षा के साथ-साथ प्रतिवर्ष कुछ होनहार बच्चों को प्रोत्साहन की तरफ से स्कॉलरशिप भी दी जा रही है।

बच्चों की दुनिया ही प्रोत्साहन है

शुरुआती दिनों में पढऩे से कतराने वाले बच्चे अब हर दिन पूरे जोश से प्रोत्साहन आते हैं। बच्चों को यहां पर आकर पढऩा और अभय सिंह के साथ समय बिताना इतना अच्छा लगता है कि वह पूरे समय यहीं रहना चाहते हैं। अक्सर बच्चे रविवार के दिन मौज-मस्ती और छुट्टी मनाने की जिद करते हैं लेकिन यहां पढऩे वाले बच्चे रविवार के दिन भी पाठशाला आने की जिद करते हैं। आमतौर पर सोमवार से शनिवार तक इस स्कूल का संचालन किया जाता है, लेकिन कई बार बच्चों की जिद और उनकी लगन को देखते हुए अभय सिंह रविवार के दिन भी पाठशाला चले आते हैं और इन बच्चों को अपना बहुमूल्य समय देते हैं।

सरकारी विद्यालय में पुस्तकालय

पाठशाला के बच्चों के साथ-साथ आस-पास के अन्य बच्चों और सरकारी स्कूल में पढऩे वाले बच्चों के लिए प्रोत्साहन की तरफ से एक पुस्तकालय भी संचालित किया जा रहा है। गेझा के सरकारी प्राथमिक विद्यालय के एक कमरे में इस पुस्तकालय की स्थापना की गई है। पुस्तकालय को 400 से ज्यादा पुस्तकें अभय सिंह ने स्वयं दी है, इसके अलावा अन्य किताबें आस-पास के लोगों से एकत्र की गई हैं।

प्रोत्साहित करने में आई कठिनाई

2013 में जब प्रोत्साहन की शुरुआत की गई थी, उस समय बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना और इस पाठशाला से जोडऩे में काफी अड़चनों का सामना करना पड़ा। इस इलाके में अधिकांश मजदूर वर्ग के लोग रहते हैं, ऐसे में बच्चों के ऊपर उनके पैरेंट्स की तरफ से पढ़ाई का कोई दबाव नहीं था। छोटे-छोटे बच्चे पूरे दिन मस्ती करने और खेलने में टाइम पास करते थे वहीं थोड़ा बड़े बच्चे अपने माता-पिता के साथ काम में उनकी मदद। ऐसे में इन बच्चों को शिक्षा की तरफ जोडऩे में काफी परेशानी आई। अभय सिंह ने घर-घर जाकर लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। शुरुआत में उनकी बातों को कोई गंभीरता से नहीं लेता था। लेकिन धीरे-धीरे उनका प्रयास सफल हुआ और आज के समय में इस इलाके के और आस-पास के गरीब-जरूरतमंद परिवार बच्चों को शिक्षा के लिए स्वयं यहां ला रहे हैं।

जल्द ही होगा मोबाइल स्कूल

शिक्षा की इस योजना को आगे बढ़ाते हुए अभय सिंह प्रोत्साहन मोबाइल स्कूल की योजना पर काम कर रहे हैं। आने वाले कुछ समय में वह मोबाइल वैन के जरिए कंस्ट्रक्शन साइट पर अपने अभिभावकों के साथ रहने वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए चलते-फिरते स्कूल की सुविधा मुहैया कराएंगे।

स्वच्छता में भी कर रहे योगदान

प्रोत्साहन की तरफ से स्वच्छता के लिए कई अहम काम किए जा रहे हैं। समय-समय पर इलाके में सफाई अभियान चलाने के साथ स्थानीय सरकारी स्कूल और पार्क में वह अपने स्कूल के बच्चों और पूरी टीम के साथ सफाई करते हैं। स्थानीय लोगों को सफाई के प्रति जागरूक कर रहे हैं और उन्हें स्वच्छ भारत बनाने की तरफ प्रेरित कर रहे हैं।

महिलाओं को बना रहे आत्मनिर्भर

बच्चों को शिक्षा का अमूल्य तोहफा देने के साथ-साथ इलाके की जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी अभय सिंह काफी लगन से काम कर रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र के माध्यम से वह मुफ्त में सिलाई की ट्रेनिंग दिलवा रहे हैं।

एक नज़र में

प्रोत्साहन के प्रयास से नोएडा के गेझा गांव में शिक्षा के प्रति शांति आंदोलन शुरू हुआ

प्रोत्साहन द्वारा संचालित स्कूलों में पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य और स्वच्छता की भी शिक्षा दी जाती है

एसबीआई ने फंड देकर स्कूल चलाने के योग्य बनाया है लेकिन आकार देने का काम स्वयंसेवकों ने किया है

हाईलाइट

क्विज प्रतियोगिता और खेल आयोजन जैसे रचनात्मक क्रियाकलापों से बच्चों को जोड़ा जाता है

निरंतर आयोजित स्वच्छता अभियानों में बच्चे भाग लेते रहते हैं



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो