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रविवार, 18 नवंबर 2018

बजट में दिखे अच्छे दिन

2017-18 के लिए पेश किए गए समेकित बजट में हर वर्ग का खास ध्यान रखा गया। सामाजिक क्षेत्रों को विशेष तौर पर तरजीह दी गई है

पहली बार आम बजट के साथ पेश किए गए समेकित बजट में आम आदमी के साथ-साथ ग्रामीण भारत, किसान, गरीबों, युवाओं का खास ध्यान रखा गया। इनके साथ इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय क्षेत्र, डिजिटल इंडिया, पब्लिक सर्विस को केंद्रित करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2017-18 के लिए 21.47 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। उन्होंने बजट पेश करते हुए बजट के तीन मुख्य एजेंडे टीईसी इंडिया (टेक इंडिया) तय किया और कहा कि आर्थिक गतिविधियों को बल देने के लिए सरकार सुधारों को जारी रखेगी। यह पहला मौका है जब आम बजट में ही रेल बजट भी शामिल है। इस बार बजट को योजना गत एवं गैर-योजनागत श्रेणियां में वर्गीकृत भी नहीं किया गया है।

किसानों का खास ख्याल
इस बजट में कृषि ऋण के लिए ऐतिहासिक रूप से 10 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया है। 'प्रति बूंद अधिक फसलÓ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रारंभिक तौर पर 5000 करोड़ रुपए की संचित निधि से एक समर्पित सूक्ष्म सिंचाई कोष स्थापित किया जाएगा। इसके साथ ही कुल 40,000 करोड़ रुपए की संचित निधि से दीर्घ अवधि सिंचाई कोष भी स्थापित किया जाएगा। संविदा खेती को लेकर एक आदर्श कानून तैयार किया जाएगा और इसे राज्यों को भी भेजा जाएगा ताकि वे इसे अपना सकें। तीन वर्षों में 8000 करोड़ रुपए की संचित निधि से नाबार्ड में एक दुग्ध प्रसंस्करण एवं अवसंरचना निधि की स्थापना की जाएगी। प्रारंभ में, इस निधि की शुरुआत 2000 करोड़ रुपए की संचित निधि से की जाएगी।
किसानों की आय को दोगुना करने में समर्थन करने के लिए मनरेगा योजना के अंतर्गत, लक्षित पांच लाख तालाबों की जगह पर मार्च 2017 तक करीब 10 लाख तालाबों का निर्माण पूरा किए जाने की उम्मीद है। इससे सूखा से प्रभावित ग्राम पंचायतों को जल की कमी से निजात मिल जाएगी। ग्रामीण, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए वर्ष 2017-18 में 1,87,233 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हंै।

गरीबी मुक्त ग्राम पंचायत
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती अर्थात् कि वर्ष 2019 तक सरकार एक करोड़ परिवारों को गरीबी से निजात दिलाने और 50,000 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त बनाने के लिए अंत्योदय मिशन पर काम किया जाएगा। वार्षिक वृद्धि एवं प्रत्येक वंचित परिवार के लिए स्थायी रूप से आजीविका हेतु केंद्रित सूक्ष्म योजना के लिए मौजूद संसाधनों का अधिक कारगर तरीके से उपयोग किया जाएगा। ग्रामीण एवं संबद्ध क्षेत्रों के लिए 1,87,223 करोड़ रुपए और दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना के लिए 2,814 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

मनरेगा के लिए रिकॉर्ड राशि
वर्ष 2016-17 में मनरेगा के अंतर्गत 38,500 करोड़ रुपए के बजटीय प्रावधान को वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 48,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। मनरेगा के लिए आवंटित बजट में अब तक की यह सबसे बड़ी धनराशि है।

बनेंगे एक करोड़ मकान
बजट में बेघर और कच्चे मकानों में रहने वाले लोगों के लिए वर्ष 2019 तक एक करोड़ मकानों को पूरा करने का प्रस्ताव है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए बजट अनुमान 2016-17 में आवंटित 15,000 करोड़ रुपए की धनराशि को बढ़ाकर बजट 2017-18 में 23,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) एवं ऋण समर्थन योजना के लिए आवंटन को बढ़ाकर तीन गुना से भी अधिक कर दिया गया है।

गांवों में हाईस्पीड इंटरनेट
हर गांव तक इंटरनेट की पहुंच बनाने को प्राथमिकता दिया गया है इस बजट में। बजट के प्रावधानों के अनुसार वर्ष 2017-18 के अंत तक 1,50,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर पर आधारित तीव्र गति इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होगी। भारत नेट परियोजना के लिए 10,000 करोड़ रुपए के बजट का प्रस्ताव किया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत 1,55,000 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर लाइन बिछाई जा चुकी है। डिजी गांव नामक एक अन्य अभियान की शुरुआत भी की जाएगी।

महिला शक्ति केंद्र
महिला सशक्तिकरण पर फोकस करते हुए महिलाओं के लिए कई प्रावधान किए गए हैं बजट में। 14 लाख आईसीडीएस आंगनवाड़ी केंद्रों में 500 करोड़ रुपए की लागत से ग्रामीण स्तर पर महिला शक्ति केंद्रों की स्थापना की जाएगी। ये केंद्र ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के उद्देश्य से स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्र्रों में ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास, रोजगार, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य एवं पोषण आदि की सुविधा मुहैया कराई जाएगी। प्रधानमंत्री द्वारा 31 दिसंबर 2016 को गर्भवती महिलाओं के लिए की गई घोषणा को दोहराते हुए वित्त ने कहा कि अस्पतालों में बच्चे को जन्म देने और बच्चे का पूर्ण टीकाकरण कराने वाली गर्भवती महिलाओं के बैंक खातों में देशभर में कुल मिलाकर करीब 6,000 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। महिला एवं बाल कल्याण के लिए बजट अनुमान 2016-17 के 1,56,528 करोड़ रुपए की धन राशि को बढ़ाकर बजट 2017-18 में 1,84,632 करोड़ रुपए प्रस्तावित किए गए हैं।
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी
बजट में शिक्षा पर काफी ध्यान केंद्रित किया गया है। उच्च शिक्षण संस्थाओं के लिए सरकार ने सभी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए स्वायत्त और स्व-संपोषित प्रमुख परीक्षा संगठन के रूप में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की स्थापना का प्रस्ताव किया है। इससे सीबीएसई, एआईसीटीई और अन्य प्रमुख संस्थानों को इन प्रशासनिक उत्तरदायित्वों से मुक्त कर दिया जाएगा, ताकि वे शैक्षिक कार्यों पर अधिक ध्यान दे सकें। विद्यालयों में वार्षिक ज्ञान परिणाम को मापने के लिए एक प्रणाली शुरू की जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय नवाचार सामग्री के जरिए सृजनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान, शिक्षा एवं पाठ्यक्रम में लचीलेपन पर विशेष जोर दिया जाएगा। सूचना प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर कम से कम 350 पाठ्यक्रमों को पढ़ाने के लिए 'स्वयंÓ नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव है। इन पाठ्यक्रमों को सर्वोत्म अध्यापकों द्वारा ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाया जाएगा। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को आभासी रूप से पाठ्यक्रम में उपस्थित होने, उच्च गुणवत्ता वाले पठन संसाधनों तक पहुंच, वाद-विवाद मंचों पर भागीदारी एवं परीक्षा देने एवं अकादमिक ग्रेड प्राप्त करने में समर्थ बनाएगा।

शिक्षा नवोन्मेष कोष
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग में उच्च शिक्षा सुधार और माध्यमिक शिक्षा में नवोन्मेष कोष प्रस्तावित किया गया है। इसका उद्देश्य व्यापक पहुंच, लैंगिक समानता और गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करने के लिए प्रारंभिक रूप से 3479 शैक्षिक रूप से पिछड़े खंडों में स्थानीय नवोन्मेष को प्रोत्साहित करना है। विद्यालयों में स्थानीय नवोन्मेष सामग्री के जरिए सृजनात्मकता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम में लचीलापन लाने पर बल दिया जाएगा। इसके लिए विज्ञान शिक्षा एवं वार्षिक ज्ञान परिणाम मापने की प्रणाली पर बल दिया जाना प्रस्तावित है।

युवाओं के लिए 'संकल्पÓ
युवाओं को रोजगार लायक बनाने और उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 4,000 करोड़ रुपए का 'संकल्पÓ कार्यक्रम पेश किया गया, जिसके तहत देशभर में 3.5 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने प्रधानमंत्री कौशल केंद्र्रों की संख्या मौजूदा 60 जिले से बढ़ाकर देशभर में 600 से अधिक जिलों तक पहुंचाने का प्रस्ताव किया है। इसके अलावा देशभर में 100 भारत अंतरराष्ट्रीय कौशल केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां उन्नत प्रशिक्षण और विदेशी भाषाओं में पाठ्यक्रमों की भी पेशकश की जाएगी। इससे 'उन युवाओं को मदद मिलेगी जो देश के बाहर नौकरी के अवसर चाहते हैं।Ó इसके अलावा 2,200 करोड़ रुपए की लागत से स्ट्राइव योजना का अगला चरण शुरू किया जाएगा जिसमें आईटीआई में व्यवसायिक प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारी जाएगी और उद्योग संकुल दृष्टिकोण से प्रशिक्षु कार्यक्रम को मजबूत किया जाएगा।

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सौगात
देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए 2017 तक कालाजार, फाइलेरिया, 2018 तक कुष्ठ और 2020 तक खसरा समाप्त करने के लिए कार्य योजना पेश की गई। इसके साथ ही झारखंड और गुजरात में दो नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) स्थापित करने का प्रस्ताव किया गया है। औषधियों की उचित मूल्यों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए औषधि और सौंदर्य प्रसाधन नियमावली में संशोधन किया जाएगा। इसी प्रकार नवजात शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) जो 2014 में 39 थी, उसे घटाकर 2019 तक 28 करने और मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) को 2011-13 के 167 से घटाकर 2018-20 तक 100 करने के लिए भी कार्य योजना बनाई गई है। 1.5 लाख स्वास्थ्य उप-केंद्र्रों को स्वास्थ्य और सेहत केंद्र्रों में परिवर्तित करने का भी प्रस्ताव किया। द्वितीयक और तृतीयक स्तरों की देखभाल को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत है, इसीलिए मेडिकल में प्रति वर्ष 5,000 सीटें बढ़ाने का फैसला किया गया है।  इसके अलावा बड़े जिला अस्पतालों में डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने, चुनिंदा ईएसआई और नगर निगमों के अस्पतालों में स्नातकोत्तर शिक्षा को मजबूत करने तथा प्रख्यात निजी अस्पतालों को डीएनबी पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करने के कदम उठाये जाएंगे।
चिकित्सा उपकरणों को विनियमित करने के लिए नई नियमावली तैयार की जाएगी। ये नियम अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार होंगे और इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेंगे। इससे इन उपकरणों की लागत कम हो जाएगी। भारत दुनिया में जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। मात्रा के हिसाब से वैश्विक निर्यात में भारतीय जेनेरिक दवाओं की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत है। देश में चिकित्सा उपकरणों के विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए इस क्षेत्र में फिलहाल 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति है।

जनजाति कल्याण
अनुसूचित जातियों के कल्याण के लिए किया जाने वाला आवंटन बजट अनुमान 2016-17 में 38,833 करोड़ रुपए था, जिसे बजट 2017-18 में बढ़ाकर 52,393 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया गया है। यह बजट अनुमान 2016-17 की तुलना में करीब 35 फीसदी अधिक है। वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए आवंटित बजट तो बढ़ाकर 31,920 करोड़ रुपए और अल्पसंख्यकों के लिए 4,195 करोड़ रुपए किया गया है। सरकार इन क्षेत्रों में खर्च की जाने वाली धनराशि की नीति आयोग द्वारा परिणाम आधारित निगरानी की व्यवस्था शुरू करेगी।



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