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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

दिव्यांगों के लिए नया कानून

नई दिल्ली। दिव्यांगों से भेदभाव करने पर अब दो साल तक की कैद और पांच लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। दिव्यांगों से जुड़े एक महत्वपूर्ण विधेयक को राज्यसभा ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। लोकसभा में भी इस विधेयक के मौजूदा सत्र में ही पारित होने की उम्मीद है।

नि:शक्त व्यक्तियों के अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र संधि और उसके आनुषंगिक विषयों को प्रभावी बनाने वाला नि:शक्त व्यक्ति अधिकार विधयेक 2014 काफी व्यापक है और इसके तहत दिव्यांगों की श्रेणियों को सात से बढ़ाकर 21 कर दिया गया है। इन 21 श्रेणी में तेजाब हमले के पीड़ितों और पर्किंसन के रोगियों को भी शामिल किया गया है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावरचन्द गहलोत के प्रस्ताव पर सदन ने संक्षिप्त चर्चा के बाद इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया। इस विधेयक पर सरकार के 120 संशोधनों को मंजूरी दी गयी जबकि विपक्ष द्वारा लाए गए विभिन्न संशोधनों को सदन ने ध्वनिमत से खारिज कर दिया। विधेयक में नि:शक्तजनों के लिए आरक्षण की व्यवस्था तीन से बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दी गई है। इसके साथ ही विधेयक में नि:शक्तजनों के लिए कई व्यापक प्रावधान किए गए हैं। विधेयक पर विभिन्न सदस्यों के स्पष्टीकरण के जवाब में गहलोत ने बताया कि इसमें नि:शक्तजनों से भेदभाव करने की स्थिति में छह महीने से लेकर दो साल तक की कैद और 10 हजार से लेकर पांच लाख रुपए तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान है।



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