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शनिवार, 21 जुलाई 2018

साक्षात्कारः अमिताभ बच्चन

वह लगभग हर दिन अखबार की सुर्खी बने रहते हैं। उनसे जुड़ी जानकारी और बातों का कोई अंत नहीं है। इसलिए उनसे बातचीत के दौरान कुछ प्रासंगिक और नये सवाल तलाश करने पड़ते है। प्रस्तुत है अमिताभ बच्चन के मीडिया मैनेजर के विशेष सहयोग से हमारे संवाददाता गोपा.सी की बातचीत के प्रमुख अंश

हर इक फ्रेंड जरूरी होता है

क्या एक्टिंग से संन्यास लेने की बात कभी सोची है ?

और एक दो साल बाद में मैं 75 पर पांव रखूंगा। शरीर कमजोर होगा। जाहिर है और ज्यादा चुनींदा काम करूंगा। वैसे यदि दर्शक उससे पहले ही मुझे बिठा देना चाहते है,उनका आदेश सिर माथे पर।

आपने अपने घर ‘जलसा’ में एक बड़ी लाइब्रेरी बना रखी है ?

बड़ी तो नहीं पर, कुछ अच्छी किताबों का संग्रह जरूर मेरी इस लाइब्रेरी में आपको मिल जायेगा। बाबूजी की वजह से मुझे यह शौक है। बाबूजी बहुत पढ़ते थे। मुझे भी किताबें पढऩे का बहुत शौक है। कई किताबें जो मैने चाव से खरीदी थी, उनमें से कई आज तक नहीं पढ़ पाया हंू। समय का अभाव खलता है। वैसे मेरी आदत है, जब एक किताब पढऩा शुरू करता हूं, तो उसे खत्म किये बिना चैन नहीं मिलता है।

क्या आप इस बात को लेकर चिंतित होते हैं कि लोग आपको भुला न दें ?

मैं इस चिंता से बिल्कुल मुक्त हूं। क्योंकि मैं ही नहीं सारे एक्टर यह अच्छी तरह से जानते हैं कि एक न एक दिन ऐसा होना लाजिमी है। असल में हमारी पहचान इस बात पर निर्भर करती है कि आप कब तक परदे पर नजर आते हैं। जहां आप परदे से या जनता की नजरों से दूर हुए ,लोग आपको पहचानना बंद कर देते हैं।

धर्मेंद्र एक बार एक थियेटर के बाहर खड़े थे। तब उन्हें  किसी ने नहीं पहचाना। इस गम में उन्होंने दिल को छू लेनेवाली एक कविता लिखी थी ?

यह उनका एक ईमानदार वक्तव्य था ,जिसे न पहचाने जाने पर उन्होंने बहुत भावुकता के साथ व्यक्तकिया।

आपके काम करने की क्षमता से आपकी उम्र और बीमारी का पता नहीं चलता है ?

यह मेरे लिए कॉम्प्लीमेंट की तरह हैं। यह एक अच्छा अनुभव है। यदि मेरा शरीर काम करने लायक है ,तो मैं कैसे घर पर बैठ सकता हूं। मुझे कैमरे के सामने एक्टिंग करना और अच्छे-अच्छे रोल करना पसंद है। मैं अपने इस प्रोफेशन को पसंद करता हूं। इसलिए जब तक मेरा शरीर साथ देगा, मैं कैमरे के सामने आता रहूंगा।

क्या आप उन खास दोस्तों को मिस करते हैं, जो अब आपके दोस्त नहीं है या दुनिया में नहीं हैं?

जिंदगी जीने के लिए दोस्तों की जरुरत पड़ती हैं। मगर कई बार मैं अकेले भी खुश रहता हूं। राजीव गांधी जैसे अपने दोस्त को मैं बराबर मिस करता हूं।

आप जब भी किसी संजीदा अभिनेता के साथ काम करते हैं ,उक्त फिल्म में आपकी उपस्थिति को बहुत तुलनात्मक ढंग से देखा जाता है ?

मैं ऐसी तुलना से कभी अप-सेट नहीं होता हूं। मैं जानता हूं ,यह मीडिया के लिए एक रोचक विषय है। पर हमारे लिए अब ऐसी कोई तुलना की बातें मायने नहीं रखती है। क्योंकि मेरे अलावा भी इडंस्ट्री में इस समय ओमपुरी,नसीरूद्दीन शाह,नाना पाटेकर जैसे कई श्रेष्ठ अभिनेता मौजूद हैं। पर जब कभी दिलीप साहब जैसे नामचीन अभिनेता के साथ मेरी तुलना की जाती है, तो मै बहुत शर्मिंदा हो जाता हूं। मुझे याद है फिल्म ‘शक्ति’ की समीक्षा करते हुए एक समीक्षक ने मेरी कुछ जरूरत से ज्यादा तारीफ  कर दी थी। मुझे पहली बार यह तारीफ अच्छी नहीं लगी, क्योंकि इस फिल्म में काम करने के दौरान मैंने दिलीप साहब से बहुत कुछ सीखा था।

एंग्री यंग मैन का आपका लोकप्रिय इमेज अब भी एक आकर्षण का विषय है ?

देखिए,कमर्शियल फिल्मों के कुछ सेट-अप होते हैं, जिनके साथ बहुत छेडख़ानी संभव नहीं है। इन दिनों यदि मेरे द्वाारा निभाए गए किसी करेक्टर में मेरी इमेज की झलक आपको मिल रही है, तो यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है। कमर्शियल फिल्मों में दर्शकों की पसंद ही सर्वोपरि होती है।

इससे आपका कलाकार मन कितना संतुष्ट होता है ?

जिन अनगिनत प्रशंसकों ने मुझे यह मुकाम दिया है ,उनकी पसंद के साथ मेरी संतुष्टि घुल-मिल जाती है। यदि उन्हें मेरी गुस्सैल छवि पसंद है, तो अपने हर रोल में स्क्रिप्ट के मुताबिक यह थोड़ा कम

या ज्यादा स्वभाविक रूप से आएगा। फिर मैं यह कैसे भूल सकता हूं कि कई बार बिल्कुल अलग-थलग रोल में भी उन्होंने मेरी हौसला अफजाई की है।



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