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शनिवार, 17 नवंबर 2018

अल्पसंख्यक हुनर हाट

नई दिल्ली। अल्पसंख्यक समुदाय के कारीगरों और शिल्पकारों के हुनर को बढ़ावा देने के लिए हुनर हाट का आयोजन किया जा रहा है। इन लोगों को अंतरराष्ट्रीय मंच मुहैया कराने के लिए 11 से 26 फरवरी के बीच नयी दिल्ली में दूसरे हुनर हाट का आयोजन किया जाएगा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने यह जानकारी दी।

कार्यक्रम का आयोजन कनॉट प्लेस में स्थित राज्य प्रदर्शनी परिसर में किया जायेगा। शिल्प और पाक कला का संगम थीम पर आधारित इस हुनर हाट की खासियत देश के विभिन्न हिस्सों से लाए गए शिल्प और पारंपरिक व्यंजन होंगे। इस हुनर हाट के लिए लगभग मंत्रालय को 24 राज्यों के दस्तकारों और व्यंजन विशेषज्ञों से करीब 550 आवेदन प्राप्त हुए। नकवी ने कहा कि 100 कारीगर व शिल्पकार और 30 व्यंजन विशेषज्ञ अपने हुनर को लोगों के सामने रखेंगे। इस हुनर हाट में कुल 130 स्टाल लगाए जायेंगे। इस हाट में कला और शिल्प के साथ-साथ देश के विभिन्न व्यंजनों का बावर्चीखाना भी होगा।

कार्यक्रम में 13 राज्यों के व्यंजन विशेषों द्वारा तरह-तरह के लजीज व्यंजनों को लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इन व्यंजनों में लखनऊ का अवधी मुगलई, राजस्थान से दाल बाटी चूरमा एवं थाली, पश्चिम बंगाल से संदेश एवं रसगुल्ला, केरल से मालाबारी फूड, बिहार का लिट्टी चोखा आदि शामिल हैं। इस प्रदर्शनी में हस्तशिल्प और हथकरघा के बेजोड़ नमूनों जैसे मकराना संगमरमर के उत्पाद, सीकर से बंधेज, राजस्थान से मोजरी, तेलंगाना से बंजारा कढ़ाई, अलीगढ़ से हाथ से बने ताले और डोर हैंडल, नगालैंड के कोकून डेकोरेटिव उत्पाद आदि भी प्रदर्शित किए जाएंगे। नकवी ने कहा कि सरकार की योजना देश के विभिन्न हिस्सों में हुनर हब स्थापित करने की है जहां भविष्य में ऐसे हाटों का आयोजन नियमित रूप से हो सके। नकवी ने कहा कि सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष को लेकर प्रधानमंत्री के नये15 सूत्री कार्यक्रम के तहत मंत्रालय के खर्च के लिए आवंटन में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी की।

‘सीखो और कमाओ’, ‘नयी मंजिल’, ‘नई रोशनी’, ‘उस्ताद’, ‘गरीब नवाज कौशल विकास केंद्र’ और लड़कियों के लिए ‘बेगम हजरत महल’छात्रवृत्ति जैसे मंत्रालय के विभिन्न छात्रवृत्ति एवं कौशल विकास कार्यक्रमों की खातिर 2,600 करोड़ रुपए की राशि निर्धारित की गयी है। नकवी ने बताया कि पिछले छह सालों में मंत्रालय ने करीब 200 ‘सद्भाव मंडप’ को मंजूरी दी। करीब 262 करोड़ रूपये की लागत से‘गुरूकल’ जैसे 16 स्कूलों को मंजूरी दी गई। उन्होंने कहा, ‘हमने मुख्यधारा की शिक्षा मुहैया करा रहे मदरसों की मदद करने का भी फैसला किया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन मंडपों का इस्तेमाल विभिन्न संस्कृति, सामाजिक, शैक्षणिक गतिविधियों के लिए सामुदायिक केंद्रों और साथ ही आपदा के दौरान राहत केंद्रों के रूप में किया जाएगा।



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