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रविवार, 18 नवंबर 2018

सेवा का कोई विकल्प नहीं

समाज के अशक्तों, पीडि़तों और वंचितों की सेवा करना और वह भी फकीर की तरह अब के लिए आसान नहीं है, लेकिन पटना के रविशंकर इस काम को पूरी तन्मयता और सहजता से कर रहे हैं

 सत्यम राजू / पटना

 

सूफी फकीर बुल्ले शाह ने एक जगह लिखा है कि 'कण विच मुंदरा, सूरत इस दी युसुफ सानी, इस अलफों अहम तणाया, रांझा जोगगिया बण आयाÓ। इसका अर्थ है कि इसके कान में योगियों की मुद्रा है, गले में गानी अर्थात ज्ञानतंत्र का ताबीज है। इसकी सूरत युसुफ से मिलती है। इसने अलफ (अ के अक्षर वाले रूप) से अहल (अरूप) की रचना की है। वह रांझा योगी बनकर आया है। हैै तो यह प्रेम गीत पर इसके अर्थ कई प्रकार से समझे  जा सकते हैं। सूफियों ने हमें प्रेम के गहरे पानियों में डुबकी लगाने को सिखाया है। वह प्रेम है जो इंसान को इंसानियत सिखाता है। पटना सचिवालय में काम करने वाले रविशंकर इन दिनों इसी जोगी की तरह इंसानियत को जिंदा रखने में लगे हुए हैं। पटना सचिवालय की अच्छी खासी नौकरी के बाद जब लोग शाम में अपने घर जाने को बेताब होते हैैं, तब रविशंकर सड़कों पर बुल्ले शाह की फकीरी की तरह समाज की सेवा की खोज में निकल पड़ते हैं।

सचमुच रविशंकर ने सरकारी नौकरी के अलावे जिस तरह पटना की गलियों में  घूम-घूमकर  गर्मी, ठंडा और मूसलाधार बारिश में समाजसेवा का अभियान शुरू किया है, वह काबिलेतारीफ है। वेतन का दस फीसद हिस्सा समाजसेवा के लिए होता है। वे सड़कों पर भूखे लोगों को खाना खिलाते हैं। जाड़े में सिकुड़ते लोगों को  गर्म कपड़े बांटते हैं। अनाथालय में बच्चों से बातें करते हैं उनकी समस्याओं को सुलझाते हैं।

31 साल के इस सरकारी सेवक ने  मां, पत्नी और तीन बच्चों के साथ पटना की सड़कों पर रहने वाले पीडि़त लोगों को भी परिवार का हिस्सा बना लिया है।  अनाथालय और वृद्धाश्रम में उसके  आने की आहट से ही लोगों की खुशी से बांछें खिल जाती हैं। इन जरुरतमंदों के लिए, गरीबों के लिए घर की रोटी और घर के पुराने और नए कपड़ेे उनका सौगात होता हैै। शनिवार और रविवार को उन्हें दिन का समय मिलता है और फिर इस दिन तो रविशंकर के लिए समाजसेवा ही भरपेट भोजन होता हैै। पटना रेलवे स्टेशन पर बारिश में कोई परेशान हो रहा हो और रवि का इसका पता चले तो समझिए कि वहां उनका जाना निश्चित है। वे जरुरतमंदों को रक्तदान करने में तनिक भी देर नहीं लगाते हैैं। कई सामाजिक संगठनों से संपर्क बनाए रवि सोशल मीडिया पर भी खूब सक्रिय रहते हैं। फेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुप से जुड़े इस समाजसेवी ने कई लोगों की जान बचाई है।  साल 2007 से पटना सचिवालय में सहायक पद पर कार्यरत रवि के बारे में उनके परिवार वाले भी पूरी तरह वाकिफ है। मां, पत्नी और बच्चे को यह पता है कि उनके वे किस रास्ते पर जा रहे हैं। पटना में सेंट्रल पैथोलाजी सेंटर जैसे जांच घर का चेन चलाने वाले डा बिपिन बिहारी वर्मा कहते हंै कि रवि हमारे लिए इस मायने में प्रेरणास्रोत हैं कि उसे यह पता नहीं है कि उसके इस छोटे से कार्य से देश के कितने लोगों का भला हो रहा है। अगर इसी प्रकार समाज के सभी व्यक्तियों में समाजसेवा मानवता के लिए एक छोटा-सा अंश दिल में हो जाए तो फिर हम एक बड़े तबके में अपनी मौजूदगी दिखा सकते हैं। डॉ. वर्मा ने गरीब और आर्थिक रूप से लाचार लोगों को लिए अपने सभी सेंटरों को यह हिदायत दे रखी है कि कोई भी रोगी पैसे के बिना इलाज से वंचित नहीं रह सके इसका विशेष ख्याल रखा जाए।

बहरहाल, रविशंकर के समाजसेवा को देखते हुए राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी की यह ताबीज याद आती है कि -तुम्हें एक जंतर देता हूं। जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा अहम तुम पर हावी होने लगे, तो यह कसौटी आजमाओ-जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने देखा हो, उसकी शक्ल याद करो और अपने दिल से  पूछो कि जो कदम उठाने का तुम विचार कर रहे हो, वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी होगा। क्या उससे, उसे कुछ लाभ पहुंचेगा? क्या उससे, वह अपने ही जीवन और भाग्य पर कुछ काबू रख सकेगा? यानी क्या उससे उन करोड़ों लोगों को स्वराज मिल सकेगा, जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त है? तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह मिट रहा है और अहम समाप्त होता जा रहा है।



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