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सोमवार, 20 मई 2019

अरबी पगड़ी पर स्वच्छता की कलगी

तेल के निर्यात के कारण होने वाली कमाई से सउदी समाज की स्थिति काफी पहले से अच्छी रही है। इसका असर वहां स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति पर साफ देखा जा सकता है

आधुनिकता के साथ संपन्नता और परंपरा के साथ रूढ़िग्रस्त जड़ता, ग्लोब पर ऐसी विलक्षणता वाले किसी देश का चयन करना होगा, तो जिस देश का नाम सबसे पहले जेहन में आएगा, वह है सउदी अरब। सउदी अरब मध्यपूर्व में स्थित एक सुन्नी मुस्लिम देश है। यह एक इस्लामी राजतंत्र है, जिसकी स्थापना 1750 के आसपास सउद द्वारा की गई थी। यहां की धरती रेतीली है तथा जलवायु उष्णकटिबंधीय मरुस्थल। सउदी अरब विश्व के अग्रणी तेल निर्यातक देशों में गिना जाता है। सउदी अरब की एक बड़ी खासियत यह भी है कि यहां इस्लाम के प्रवर्तक मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था और यहां इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थल मक्का और मदीना हैं।

जल और स्वच्छता 
तेल के निर्यात के कारण होने वाली कमाई से सउदी समाज की स्थिति काफी पहले से अच्छी रही है। इसका असर वहां स्वास्थ्य और स्वच्छता की स्थिति पर साफ देखी जा सकती है। सउदी अरब विश्व के उन कुछ देशों में शामिल है जिसने स्वच्छता का 100 फीसदी लक्ष्य बहुत पहले हासिल कर लिया है। फिलहाल वहां अगर कुछ समस्या है तो वह पानी को लेकर है। वहां 97 फीसदी आबादी को स्वच्छ जलापूर्ति तो हो रही है पर 3 फीसदी आबादी अब भी इस सुविधा से दूर है।

तंबाकू पर बैन
सार्वजनिक के साथ निजी जीवन में भी सउदी अरब में स्वास्थ्य और स्वच्छता को काफी महत्व दिया जाता है। इसकी ताजा मिसाल है वहां तंबाकू पर नियंत्रण के लिए सऊदी राष्ट्रीय समिति ने बड़ी पहल की है। इसके तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर 1300 डॉलर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इस पहल की खासियत लोगों को धूम्रपान से होने वाली जानलेवा बीमारियों से बचाना है, इसके लिए ध्रूम्रपान करने वालों के इलाज के लिए मोबाइल क्लीनिक भी देशभर में होंगे। 

शराब पहले से प्रतिबंधित
तंबाकू सेवन के लिए लगाए जाने वाले दंड में सिगरेट, सिगार, पाइप, जिग, शीशा, चबाने वाली जैसी वस्तुओं या किसी अन्य प्रासंगिक विधि का उपयोग करना शामिल होगा। जिन स्थानों को खासतौर पर धूम्रपान निषिद्ध क्षेत्र बनाया गया है, वे हैं- मस्जिद, शैक्षिक संस्था, हॉस्पिटल, स्पोर्ट्स कांप्लेक्स, सांस्कृतिक स्थल, बैंकों और दूसरे सरकारी-निजी कार्यस्थल। दिलचस्प है कि सऊदी अरब में शरियत कानून होने की वजह से शराब पर पहले से ही प्रतिबंध है।

स्वच्छता के स्वयंसेवक
सउदी समाज में स्वच्छता और सफाई को लेकर काफी जागरुकता है। इसकी मिसाल वहां हाल में 66 स्वयंसेवकों का बना एक समूह है। इस समूह में नौजवानों के साथ बूढ़े लोगों को भी शामिल किया गया है। समूह के स्वयंसेवकों ने हर शुक्रवार की सुबह जेद्दाह के तट पर कचरे को हटाने के लिए योजना बनाई है। यह कदम सऊदी अरब को हर लिहाज से स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लक्ष्य के तहत उठाया गया है। समुद्र तट पर चूंकि कई तरह की गंदगी और कबाड़ जमा होने का खतरा रहता है, इसीलिए इसकी शुरुआत नई जेद्दाह समुद्र तट को बेहतर और साफ रखने के साथ किया गया है, यहीं यहां का सबसे लंबा पैदल चलने वाला पुल भी है। इस स्वच्छता समूह के संस्थापक डॉ. सईद ने जेद्दाह निवासियों से अनुरोध किया कि वह इस स्वच्छता अभियान से जुड़ें और सऊदी को स्वच्छ रखें। 

बदलाव की बयार
सउदी अरब में इन दिनों बदलाव की बयार बह रही है। इस कारण वहां एक तरफ जहां सरकार की नीतियों में खुलापन दिख रहा है, वहीं इससे वहां के समाज में खासतौर पर महिलाओं की स्थिति तेजी से बदल रही है। ऐसे ही एक फैसले में सउदी हुकूमत ने अपने यहां घूमने आने वाले लोगों की सहूलियतें बढ़ा दी हैं। दिलचस्प है कि यहां हर साल करीब 250 मिलियन पर्यटक आते हैं, जिन्हें यहां की गुफाएं सबसे आकर्षित करती हैं। प्राचीन में अरब के खानाबदोश लोगों ने गुफाओं को एक सुरक्षित आश्रय के रूप में माना, क्योंकि यह उन्हें गंभीर गर्मी और ठंड के साथ-साथ रेतीली हवाओं से सुरक्षित करता था। गुफाओं का पानी भी एक अच्छा स्रोत था। सऊदी अरब जो हजारों मुसलमान हर साल तीर्थ यात्रा पर आते हैं, उनके लिए भी इन गुफाओं की अहमियत है। मक्का के ऐतिहासिक गुफा ‘गारे हेरा’ के बारे में तो प्रसिद्ध है कि वहीं पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल.) को 610 ई. में पहला ज्ञान मिला था। 



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