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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

सूखा-स्वच्छता के संकट से जूझता देश

स्वच्छता दायरे में अब तक इस देश की तकरीबन 50 फीसदी आबादी ही आ पाई है। यानी स्वच्छता के पूर्ण लक्ष्य से यह देश अभी आधी दूरी पर खड़ा है

नांबिया या नामीबिया, नाम कोई भी लें पर इस दक्षिण अफ्रीकी देश की पूरी दुनिया में एक ही पहचान है- रेत और गरीबी। दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका के इस उप-सहारा देश की राजधानी विंडहॉक है, जहां थोड़ी आधुनिकता भले दिख जाए पर यह शहर भी अपने स्लम इलाकों में अपने देश की स्थिति का सच अच्छे से बयां करता है। नामीबिया अपने संविधान में पर्यावरण संरक्षण को शामिल करने वाला दुनिया का पहला देश है, पर दुर्भाग्य से सीधे पर्यावरण से ज्यादा संकट यहां पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर है। लिहाजा, जिन हालात में लोग रह रहे हैं, वे खासे अस्वास्थ्यकर हैं। यह संकट यहां इस कारण ज्यादा जानलेवा नहीं क्योंकि नामीबिया पृथ्वी पर सबसे कम घनी आबादी वाला देश है। 

स्वच्छता लक्ष्य से कोसों दूर
बात स्वच्छता की करें तो नामीबिया इसमें काफी पिछड़ा हुआ है। ऐसा यहां दो वजहों से रहा है। पहली वजह है पानी की कमी और दूसरी है गरीबी। स्वच्छता दायरे में अब तक इस देश की तकरीबन 50 फीसदी आबादी ही आ पाई है। यानी स्वच्छता के पूर्ण लक्ष्य से यह देश अभी आधी दूरी पर खड़ा है। जिस 50 फीसदी आबादी तक यहां अब भी उन्नत और सुरक्षित शौच के साथ सुरक्षित पेयजल की सुविधा पहुंचनी है, उसके लिए यहां की सरकार तो प्रयास कर ही रही है। साथ ही इसके लिए यूनिसेफ सहित विश्व की कई संस्थाएं मदद कर रही हैं। लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवनस्तर को ऊपर उठाने के लिए कुछ संपन्न देश भी मदद कर रहे हैं। 

सबसे पुराना रेगिस्तान
नामीबिया का नाम नामीब रेगिस्तान पर पड़ा है। यह रेगिस्तान दुनिया का सबसे पुराना रेगिस्तान है। वैज्ञानिकों की मानें तो नामीब रेगिस्तान दस लाख से अधिक वर्षों से रेगिस्तान में रेत अस्तित्व में है। नामीबिया के पड़ोसी देश हैं- अंगोला, बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका। देश का पश्चिमी भाग कालाहारी मरुस्थल के क्षेत्रों में से एक है। यहां के मूल वासियों में बुशमैन, दामाका जातियों का नाम सर्वप्रमुख है। जर्मनी ने 1884 में इसको अपना उपनिवेश बनाया था और प्रथम विश्युद्ध के बाद यह दक्षिण अफ्रीका का क्षेत्र बन गया। 

पार्क और उल्का
यहां स्थित एटोशा नेशनल पार्क अफ्रीका के सबसे अच्छे पार्कों में से एक है। यह आकार और वन्य जीवन की विविधता के लिए जाना जाता है - अफ्रीका के सबसे ऊंचे हाथियों, लुप्तप्राय काले राइनो और 91 अन्य स्तनपायी प्रजातियां इनमें शामिल हैं। 
गिबोन उल्काशोथ बौछार पृथ्वी पर सबसे बड़ा उल्का बौछार है। यह प्रागैतिहासिक काल में हुआ था, लेकिन केंद्रीय नामीबिया में 100 किलोमीटर की दूरी पर एक बड़े क्षेत्र को कवर किया था। यह एक लोहे का उल्कापात था। नामीबिया, सैन या बुशमैन के शुरुआती निवासियों ने हथियारों और उपकरणों को बनाने के लिए उल्का की सामग्री का इस्तेमाल किया। उल्का के कुछ अवशेष नामीबिया की राजधानी विंडहोक शहर के केंद्र में प्रदर्शित होते हैं।

प्यास बुझने की उम्मीद
करीब छह साल पहले प्यास बुझाने के लिए संघर्ष करते इस देश के लिए अच्छी खबर आई। नामीबिया की स्थिति को लेकर फिक्रमंद बाकी दुनिया के लिए भी यह बड़ी खबर थी कि अफ्रीकी रेगिस्तान सहारा के दक्षिणी इलाके में स्थित इस सूखाग्रस्त देश में भूमिगत जल का एक नया स्रोत पाया गया है। माना जा रहा है कि इस खोज से नामीबिया के विकास पर असरदायक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अनुमानों के अनुसार वर्तमान खपत के आधार पर ये जल भंडार नामीबिया के उत्तरी इलाके की अगले 400 साल तक की पानी की जरूरत को पूरा कर सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि खोजे गए भंडार का पानी कम से कम दस हजार साल पुराना है, हालांकि ये अभी भी वर्तमान स्रोतों से मिले पानी से ज्यादा शुद्ध है। अधिकारियों को अब चिंता ये सता रही है कि कहीं पानी की जानकारी पाकर लोग अनधिकृत खुदाई न शुरू कर दें।
उत्तरी नामीबिया के इलाकों में जगह-जगह पानी के स्रोतों की अधिकता है या कुछ जगह बिल्कुल ही नहीं हैं। इस इलाके में रहने वाले आठ लाख लोग अपने पीने के पानी की जरूरत की पूर्ति के लिए चालीस साल पुरानी एक नहर पर निर्भर हैं। पिछले लगभग एक दशक से नामीबिया की सरकार इस समस्या से निबटने के लिए जर्मनी और यूरोपीय संघ के वैज्ञानिकों की मदद ले रही है। एक अरसे तक मेहनत के बाद वैज्ञानिकों के दल ने इस जलाशय ओहैंगवेना-2 को खोज निकाला जो अंगोला और नामीबिया के सीमावर्ती इलाकों पर स्थित है। नामीबिया की सीमा में जलाशय का हिस्सा 2,800 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। 

400 वर्षों तक के लिए पानी
जर्मनी के वैज्ञानिक और नामीबिया में चल रहे इस प्रोजेक्ट के मैनेजर मार्टिन कूइंगर कहते हैं कि पाया गया पानी का भंडार काफी बड़ा है। उन्होंने कहा, ‘यहां जितना पानी जमा है उससे नामीबिया के उत्तरी इलाके में चार सौ सालों तक वर्तमान जरूरत भर के पानी की आपूर्ति की जा सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘हम कोशिश कर रहे हैं कि इस जलाशय से उतना ही पानी निकाला जाए जितने की पूर्ति प्राकृतिक तौर पर ही हो जाए।’
उत्तरी नामीबिया में पानी की आपूर्ति दो नदियों के माध्यम से की जाती है इसलिए वहां की खेती नदियों के किनारों तक ही सिमट कर रह गई है। कूइंगर का मानना है कि इस जलाशय से इलाके में कृषि की दशा-दिशा बदल सकती है।
इस जलाशय का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये पर्यावरण में हो रहे बदलावों के बीच देश के पानी की जरूरतों को पूरा कर सकता है। भूमिगत पानी में अच्छे दबाव होने का मतलब है कि इसे निकालना आसान और कम खर्चीला होगा। लेकिन नए जलाभृत के ऊपर एक नमकीन पानी की भी सतह है जो अनधिकृत खुदाई को और खतरनाक बना देती है। पानी के लिए बेतरतीब खुदाई से पानी की शुद्धता को नुकसान पहुंच सकता है।

वैज्ञानिक राय 
कूइंगर बताते हैं, ‘अगर खुदाई करते वक्त तकनीकी मापदंडों का पालन नहीं किया गया तो दो जलाभृतों के बीच रिसाव की जगह बन सकती है जिससे जमीन के भीतर अलग-अलग परतों में जमा पानी मिश्रित हो जाएगा।’ इस जलाशय का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये पर्यावरण में हो रहे बदलावों के बीच देश के पानी की जरूरतों को पूरा कर सकता है। वैज्ञानिकों के एक शोध के अनुसार ये जलाशय नामीबिया को 15 साल तक लगातार सूखा पड़ने की स्थिति से उबार सकता है।



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