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सोमवार, 23 अप्रैल 2018

रोशन होगा देश का हर गांव

केंद्र सरकार के 31 मार्च 2017 तक सभी गांवों में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त करना संभव

लखनऊ के पास भिखारीपुर गांव की रहने वाली रमा देवी ने शिकायत की, हमारी झोपड़ी में अभी तक बिजली नही आई है। फौरन सरकारी इंजीनियर को समस्या का निदान करने का आदेश दिया गया। बिजली विभाग के इंजीनियर ने जब रमा देवी के घर में पहला बल्ब जलाया तब उनके चेहरे पर जो खुशी झलकी थी उसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता था।

पिछले स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि 1000 दिन के अंदर शेष सभी गांवों का विद्युतीकरण किया जाएगा। 2011 की जनगणना के आधार पर राज्यों ने 1 अप्रैल 2015 को 18452 ऐसे गांवों की सूची सौंपी थी जिनमें विद्युतीकरण नहीं हुआ था। सरकार ने योजना की निगरानी और पारदर्शिता बरतने के लिए इन गांवों में 309 ग्रामीण विद्युत अभियंताओं की तैनाती की। इससे राज्य सरकार पर उच्च गुणवत्ता और समय पर कार्य पूरा करने का दबाव रहेगा। ग्रामीण इलाकों में विद्युतीकरण करना आने वाली सरकारों के लिए एक चुनौती बन चुकी है। राज्य सरकार जहां बिजली वितरण और इसका बुनियादी ढांचा मुहैया कराती है वहीं केंद्र सरकार विद्युतीकरण के लिए नीति बनाती है और आर्थिक मदद मुहैया कराती है। राज्यों के धीमे प्रदर्शन के कारण एनडीए सरकार ने दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की शुरुआत की। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में तेजी से विद्युतीकरण करना है तथा यह भी सुनिश्चित करना है कि गांवों में बिजली पर्याप्त मात्रा में मिलती रहे। केंद्र सरकार ने वर्ष 2016-17 के बजट में ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के लिए 8500 करोड़ रुपए की वृद्धि कर दी।  

विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक भारत की 78.7 प्रतिशत आबादी बिजली का उपयोग करती है। केंद्र सरकार की दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना का उद्देश्य 31 मार्च 2017 तक सभी गांवों का विद्युतीकरण करना है।



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