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मंगलवार, 11 दिसंबर 2018

स्वच्छता और समाज सुधार के अग्रदूत.. डॉ. विन्देश्वर पाठक

समाज सुधारक और पद्म भूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक के स्वच्छता और समाज सुधार के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान की वजह से ही रेल मंत्रालय ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है।

समाज सुधारक डॉ. विन्देश्वर पाठक ने न केवल स्वच्छता के क्षेत्र में समाज में जागरुकता पैदा की, बल्कि समाज के दबे-कुचले लोगों को गरिमामय जिंदगी भी प्रदान की । समाज सुधार के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान की वजह से ही रेल मंत्रालय ने उन्हें अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है। उन्होंने 1970 में सुलभ इंटरनेशनल सोशल सर्विस ऑर्गनाइजेशन की स्थापना की। आज के समय में सुलभ देश के 26 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में काम कर रहा है। डॉ. पाठक ने किफायती शौचालय तकनीक ‘टू-पिट-पोर-फ्लश’ विकसित कर घर-घर शौचालय पहुंचाने के कठिन काम को भी आसान बना दिया है। अब तक 1.3 मिलियन घरों में सुलभ शौचालय बनाने जा चुके हैं। इसके अलावा सुलभ डिजाइन पर 54 मिलियन सरकारी शौचालय बनाए गए हैं। 8500 से ज्यादा जगहों पर सामुदायिक सुलभ शौचालयों का निर्माण कराया गया है। डॉ. पाठक और सुलभ इंटरनेशनल के संयुक्त प्रयासों की वजह से 15 मिलियन लोग हर दिन सुलभ शौचालय का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही 640 गांवों को स्कैवेंजिंग मुक्त बनाया गया है। स्कैवेंजर्स को उन्होंने घृणित काम से मुक्ति दिलाकर उनका उत्थान किया और समाज की मुख्यधारा में शामिल कराया। इसके साथ ही मानवाधिकार, पर्यावरण, वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया है। स्वच्छता और सफाई के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले डॉ. पाठक देश-विदेश के कई प्रतिष्ठित सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। 2003 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म भूषण’ सम्मान से सम्मानित किया। पर्यावरण में योगदान के लिए लिए ‘इंदिरा गांधी प्रियदर्शिनी पुरस्कार’ दिया गया। बेहतर सेवा के लिए उन्हें ‘एनर्जी ग्लोब अवॉर्ड’, ‘द दुबई इंटरनेशनल अवॉर्ड’, 2009 में ‘स्टॉकहोम वाटर प्राइज’ और 2013 में फ्रेंच सिनेट की तरफ से ‘द लिजेंड ऑफ प्लानेट अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। समाजसेवा के क्षेत्र में डॉ. पाठक के अतुलनीय योगदान की वजह से न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ने 14 अप्रैल 2016 को ‘डॉ. विन्देश्वर पाठक डे’ के रूप में घोषित कर उन्हें सम्मानित किया। 1968 से स्वच्छता और समाज सुधार के लिए काम करने वाले डॉ. पाठक के लगभग पांच दशक के अनुभव से ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।


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