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सोमवार, 15 अक्टूबर 2018

स्वच्छ भारत सपने को पंख लगाएगी रेल

रेल मंत्रालय ने सुलभ इंटरनेशनल के प्रणेता पद्म भूषण डॉ. विन्देश्वर पाठक को ‘स्वच्छ रेल मिशन’ का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त किया है। शौचालय के क्षेत्र में देश और समाज के लिए अमूल्य योगदान देने वाले डॉ. पाठक अब देश के रेलवे स्टेशनों पर स्वच्छता की मिसाल पेश करेंगे

स्वच्छता के अग्रदूत गांधी जी ने लगभग एक सदी पहले रेलवे की गंदगी दूर करने के लिए देशवासियों का ध्यान आकृष्ट किया था। 25 सितंबर 1917 को समाचार पत्रों को लिखे अपने पत्र में उन्होंने लिखा था, ‘जिस तरह की गंदगी और स्थिति रेलवे के इन डिब्बों में है उसे जारी नहीं रहने दी जा सकती है, क्योंकि इससे स्वास्थ्य और नैतिकता दोनों प्रभावित होते हैं।’ अपने पत्र में उन्होंने रेलवे में फैली गंदगी और उसे दूर करने के उपायों के बारे में विस्तार से लिखा था। लगभग एक सदी बीत जाने के बाद भी रेलवे के हालात कुछ वैसे ही थे। रेलवे स्टेशन के साथ ही उसकी गंदगी की भी तस्वीर सामने आ जाती है। प्लेटफॉर्म पर इधर-उधर फैले कूड़े। गंदगी से भरा रेलवे ट्रैक। पान-गुटखों की पीक से बदरंग हुई दीवारें। मूंगफली के छिलके। चिप्स के रैपर और कचरों से अटा पड़ा रेलवे कोच। बदबू से गंदगी का एहसास कराते शौचालय और ऊपर से यात्रियों की भारी भीड़। कुछ साल पहले तक भारतीय रेल की ऐसी ही छवि थी। लेकिन आज ब्यास और गांधीधाम रेलवे स्टेशन की साफ-सफाई, नाशिक रोड की सुंदरता, सूरत की स्वच्छता आदि रेलवे की बदसूरत छवि को खूबसूरत बनाने का काम कर रही हैं। सफाई को लेकर रेलवे में यह बदलाव आना शुरू हुआ है ‘स्वच्छ रेल मिशन’ के तहत। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वच्छ भारत मिशन शुरू करने के साथ ही रेलवे ने एक कदम आगे बढक़र न केवल ‘स्वच्छ रेल मिशन’ की शुरुआत की, बल्कि इस क्षेत्र में वह काफी तेजी से काम भी कर रही है। गांधी जी के सपने को साकार करने और प्रधानमंत्री मोदी के ‘स्वच्छ भारत-सुंदर भारत’ को धरातल पर उतारने के लिए रेल मंत्री सुरेश प्रभु लगातार काम कर रहे हैं। इस मिशन के तहत मार्च 2016 तक 35 हजार बायो-टॉयलेट लगाए जा चुके हैं और इस वर्ष के अंत तक 30 हजार अतिरिक्त बायो-टॉयलेट लगाए जाने की योजना है। 2019 तक सभी 45 हजार ट्रेन कोच पूरी तरह से बॉयो-टॉयलेट युक्त हो जाएंगे। ट्रेनों के अंदर साफ-सफाई के लिए कूड़ेदान की व्यवस्था, ‘क्लीन माई कोच’ सेवा की शुरुआत की गई। ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज सुधारक और सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को‘स्वच्छ रेल मिशन’ का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने दो नवंबर 2016 को डॉ. पाठक को ‘स्वच्छ रेल मिशन’ का ब्रांड एंबेसडर नियुक्त कर सम्मानित किया और प्रसन्नता जाहिर की। उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक के पास स्वच्छता का लंबा अनुभव है। उनका संस्थान ‘सुलभ’ शुरू से ही इस क्षेत्र में काम कर रहा है। इसीलिए‘सुलभ’ रेलवे के साथ मिलकर उसे साफ और सुंदर बनाने के लिए बेहतर काम करेगा।

सुलभ ने पहले भी की है सफाई

‘स्वच्छ रेल मिशन’ की जिम्मेदारी देने से पहले भी रेलवे डॉ. विन्देश्वर पाठक के अनुभव से लाभांवित हो चुकी है। ‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ अभियान के तहत रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने सितंबर महीने में स्वच्छ सप्ताह चलाया था। रेल परिसर में सफाई और स्वच्छता तथा रेल यात्रियों को सफाई की आदत के प्रति जागरूक करने के लिए रेलवे ने यह कार्यक्रम चलाया था। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से स्वच्छ सप्ताह की शुरुआत करने के बाद रेल मंत्री ने देश के पांच बड़े रेलवे स्टेशन पुरानी दिल्ली, जयपुर, गोरखपुर, अहमदाबाद और ग्वालियर की सफाई की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल को दी थी। वह इन स्टेशनों पर बेहतर तरीके से सफाई कर रहा है।

स्वच्छ रेल के लिए अभियान

‘स्वच्छ रेल-स्वच्छ भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के उद्देश्य से रेल मंत्रालय समय-समय पर स्वच्छता अभियान चला रहा है। रेलवे ने स्वच्छ रेल स्वच्छ भारत अभियान के तहत 17 से 26 सितंबर 2016 के दौरान ‘स्वच्छ सप्ताह’ चलाया। इससे पहले 16 से 31 अगस्त 2016 तक स्वच्छता पखवाड़ा आयोजित किया गया। रेल हमसफर सप्ताह के तहत 26 मई 2016 को स्वच्छता दिवस मनाया गया। ऑफिस, अस्पताल और फैक्ट्रियों में जागरूकता संदेश देने के लिए दिसंबर 2015 से मार्च 2016 के बीच थीम बेस्ड अभियान चलाया गया। साल 2015 में 11 से 31 अक्टूबर के दौरान सरदार पटेल यूनाइटेड क्लीन इंडिया ड्राइव चलाया गया। सितंबर 2015 से मार्च 2016 की अवधि में थीम बेस्ड नेशनल कैंपेन चलाए गए और मई / जून 2015 में स्वच्छता के प्रति यात्रियों की राय जानने के लिए रेलयात्री उपभोक्ता पखवाड़ा चलाया गया। इसके अलावा ‘स्वच्छ रेल मिशन’ के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रेलवे समय-समय पर अभियानों के जरिए जुटी हुई है।

रेल बजट में स्वच्छता पर जोर

रेल बजट 2016-17 में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने स्वच्छता की रेल चलाने की घोषणा की थी। रेल बजट पेश करते हुए उन्होंने कहा था कि स्वच्छ रेल से ही स्वच्छ भारत का सपना पूरा होगा। उन्होंने साफ व सुंदर स्टेशन, चमचमाते प्लेटफॉर्म और स्वच्छ शौचालयों से युक्त ट्रेनें चलाने, चलती ट्रेनों में सफाई की व्यवस्था करने, डस्टबिन लगाने और आधुनिक शौचालय स्थापित करने का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि विभिन्न ट्रेनों में 30 हजार अतिरिक्त बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे। साथ ही वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और महिला यात्रियों की मांग पूरी करने के लिए चुनिंदा स्टेशनों के सभी प्लेटफॉर्मों पर पोर्टेबल बायो टॉयलेट चलंत (जैव-शौचालय) मुहैया कराए जाएंगे। साफ-सुथरे और ए-1 श्रेणी के स्टेशनों पर वेस्ट सेग्रीगेशन और रिसाइक्लिंग सेंटर बनाए जाएंगे। इसके साथ चुनिंदा स्टेशनों और निकटवर्ती कॉलोनियों की सफाई में सुधार लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। नवीन तकनीक के प्रयोग पर जोर देते हुए विश्व का पहला बायो वैक्यूम टॉयलेट (डिब्रूगढ़ राजधानी) का ईजाद किया गया। 74रेलगाडिय़ों को ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सेवा के अंतर्गत डाला गया है और अन्य 400 को जल्द ही इसमें डालने की तैयारी है। जिससे साल के अंत तक इस योजना के अंतर्गत रेलगाडिय़ों की कुल संख्या 1000 हो जाएगी। स्मार्ट सवारी डिब्बा योजना के तहत यात्रियों की सुविधा के लिए सवारी डिब्बों में बायो वैक्यूम टॉयलेट, वाटर लेवेल इंडिकेटर और डस्टबिन की व्यवस्था पर जोर दिया गया। पांच हजार सवारी डिब्बों में डस्टबिन लगाए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, सफाई को लेकर स्टेशनों के बीच प्रतिस्पर्धा कराई जाएगी। इसके लिए यात्रियों के फीडबैक और थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। स्वच्छता के लिए ‘पर्यावरण व हाउस कीपिंग निदेशालय’ नाम से अलग एक विभाग बनाया गया है।

क्लीन माई कोच

रेल बजट में घोषित चलती ट्रेन में ‘क्लीन माई कोच’ सेवा की शुरुआत की जा चुकी है। वर्तमान में 1831 ट्रेनों में यह सुविधा उपलब्ध है। रेल यात्री अपने कोच या शौचालय की सफाई के लिए एसएमएस से या वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन आग्रह कर सकते हैं। इस सेवा का फायदा उठाने के लिए मोबाइल फोन से 58888 नंबर पर एसएमएस करना होगा। इसके अलावा www.cleanmycoach.com पर जाकर भी अपना अनुरोध कर सकते हैं। या फिर, अपने एंड्रॉयड फोन पर ऐप डाउनलोड कर रिक्वेस्ट भेज सकते हैं। इसके लिए अलग से कोई भुगतान नहीं करना होगा।

क्रिएटिविटी से बदली काया

रेल बजट के अनुरूप स्टेशनों पर स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए क्रिएटिविटी का सहारा लिया जा रहा है। सामाजिक संगठनों की मदद से रेलवे स्टेशनों की दीवारों को भित्तिचित्रों (ग्रैफिटी) से सजाया गया है। इससे न केवल सौंदर्य निखरा है बल्कि सामाजिक रूप से प्रासंगिक विषयों के बारे में जागरूकता का प्रसार भी हुआ है। सवाई माधोपुर रेलवे स्टेशन पर वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन (वन्यजीव संरक्षण) को चित्रों के जरिए दिखाया गया है, वहीं हजारीबाग, बोरीवली, खार, उदयपुर और बीकानेर रेलवे स्टेशन पर स्थानीय कला का नायाब नमूना पेश किया गया है।

स्वच्छता में अव्वल रेलवे स्टेशन

 

1. ब्यास (पंजाब)

2. गांधीधाम (गुजरात)

3. वास्को-द-गामा (गोवा)

4. जामनगर (गुजरात)

5. कुंबकोनम (तमिलनाडु)

6. सूरत (गुजरात)

7. नासिक रोड (महाराष्ट्र)

8. राजकोट (गुजरात)

9. सलेम (तमिलनाडु)

10. अंकलेश्वर (गुजरात)

दुनिया के अदभुत रेलवे स्टेशन

 

1. ग्रांड सेंट्रल टर्मिनल, न्यूयॉर्क, अमेरिका

2. लीज गुलेमन्स, बेल्जियम

3. संत पैंक्रास इंटरनेशनल, लंदन, यूनाइटेड किंगडम

4. डनडिन स्टेशन, न्यूजीलैंड

5. मिलानो सेंटरैले, इटली

6. हैदरपासा टर्मिनल, इस्तांबुल, तुर्की

7. एटोचा स्टेशन, मैड्रिड, स्पेन

8. कुआलालंपुर रेलवे स्टेशन, मलेशिया

9. लुज स्टेशन, ब्राजील

10. कैमिनो डे फेरो डे मोकैबिक, मोजांबिक

भारतीय रेल : एक नज़र

 

2.3 करोड़ लोग यात्रा करते हैं भारतीय रेल में हर दिन

13,000 ट्रेनें भारतीय रेल ट्रैक पर हर दिन दौड़ती हैं

3300 मेल/एक्सप्रेस लंबी दूरियां तय करती हैं

8000 देशभर में रेलवे स्टेशन हैं

75-ए1 श्रेणी के रेलवे स्टेशन

332-ए श्रेणी के रेलवे स्टेशन

594 मॉडल रेलवे स्टेशन

637 मॉडर्न स्टेशन बनाए गए

1252 आदर्श स्टेशन हैं देश में

2006-2009 के बीच मॉडल स्टेशन योजना

सफाई के काम

 

 35 हजार बायो-टॉयलेट मार्च 2016 तक ट्रेनों में लगे

साल के अंत तक 30 हजार बायो-टॉयलेट और लगेंगे

5000 सवारी डिब्बों में कूड़ेदान लगाए जा चुके हैं

1000 रेलगाडिय़ों में ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग की व्यवस्था

3 लाख बेड रोल्स का इस्तेमाल हर दिन होता है

1831 ट्रेनों में क्लीन माई कोच सेवा की सुविधा मौजूद है

 

 

 

 

 

 

 

 

 



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