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शुक्रवार, 22 जून 2018

सुलभ आकर अभिभूत हुए न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर

सुलभ कैंपस में कदम रखते ही जस्टिस ठाकुर के चेहरे पर संतोष, सुख और शांति के भाव दिखे। संतोष, अपने गांव वालों के खिलखिलाते चेहरों को देखने का था। सुख, वाराणसी और वृदांवन की विधवा मांओं के साथ खुशी बांटने का था और शांति इस बात की थी कि देश और समाज के लिए 'सुलभ’ एक नई मिसाल पेश करता रहेगा

पहली बार जब मैं पाठक साहब से मिला वह मुझे एक किताब देने के लिए आए थे। मैंने इनसे अनुरोध किया कि मेरे इलाके में भी कुछ काम हो जाए तो मुझे बड़ी खुशी होगी। क्योंकि मेरा इलाका पहाड़ी है, वहां पर बर्फ पड़ती है। वहां पर लोगों को, खासकर बुजुर्ग मांओं को शौच जाने में काफी दिक्कत होती थी। मैंने कहा आप कुछ कर सको तो बहुत अच्छा होगा। पाठक साहब मेरे कहने से मेरे गांव उखराल तक पहुंचे। वहां के लोगों से मिले। बातचीत की। वहां जाकर उन्होंने कितने ही शौचालय बनवाए। कुछ ट्रेनिंग सेंटर्स खोले। एक कंप्यूटर सेंटर खोला, जिसमें अब लड़कियां ट्रेनिंग ले रही हैं। सिलाई सेंटर खोले। आज कई लोग मुझसे सिफारिश करते हैं कि उधर इतने शौचालय बन गए तो हमारे भी बनने चाहिए। डॉ. विन्देश्वर पाठक ने जो मूवमेंट वहां शुरू किया है उसकी पहल पर आज लोगों ने खुद शौचालय बनाने शुरू कर दिए हैं। क्योंकि लोगों को लग रहा है कि इससे कितनी सहूलियत है। खासकर औरतों के लिए जिन्हें काफी परेशानी झेलनी पड़ती थी। लेकिन शौचालय होने से उनकी राह आसान हो गई है। आज हम यहां अपने इलाके के लोगों के चेहरे पर मुस्कान देखकर काफी तसल्ली महसूस करते हैं। इंसानियत के लिए यह बहुत बड़ी सर्विस है जिसके लिए हम हमेशा पाठक साहब के शुक्रगुजार रहेंगे। यह कहना है भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर का। सुलभ कैंपस में अपने गांव उखरैल (जम्मू) के लोगों से मिलने आए जस्टिस ठाकुर ने बताया कि कैसे उनके आग्रह पर सुलभ सेनिटेशन मिशन के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक ने उनके गांव उखरैल की दशा और दिशा बदलने में योगदान दिया।

31 दिसंबर 2016 को सुलभ कैंपस में आए न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने डॉ. पाठक द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की। इस मौके पर वह अपने गांव उखरैल से आए लोगों से मिले और वहां पर सुलभ द्वारा किए जा रहे सैनिटेशन और वोकेशनल ट्रेनिंग से संबंधित कामों की जानकारी भी ली।

 

जस्टिस ठाकुर का हुआ भव्य स्वागत

सुलभ कैंपस में न्यायमूर्ति जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर का पारंपरिक अंदाज में भव्य स्वागत किया गया। शंख की मधुर ध्वनि, वेद पाठियों के मंत्रोच्चार और स्वस्ति वाचन। रंग-बिरंगे फूलों से सजा कैंपस और रेड कारपेट। सुलभ इंटरनेशनल सैनिटेशन मिशन के प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक और श्रीमती अमोला पाठक ने फूलों की माला और शॉल देकर उनका पूरी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। डॉ. पाठक ने जस्टिस ठाकुर को सम्मान-पत्र, मधुबनी पेंटिंग और रामचरित मानस की प्रति भी भेंट की। सुलभ से जुड़े हुए रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों, कोलकाता से आए सुलभ लाभार्थियों और सुलभ के समर्पित कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक अंदाज में उनका स्वागत किया। राजस्थान के अलवर और टोंक की पुनर्वासित स्कैवेंजर महिलाएं, वृंदावन और वाराणसी की विधवा माताएं और पूरी तरह से खुले में शौचमुक्त हो चुके गांव हिरमथला (हरियाणा) के सुलभ लाभार्थियों ने भी जस्टिस ठाकुर का अभिनंदन किया।

कैंपस देख अभिभूत हुए जस्टिस ठाकुर

सुलभ कैंपस में जस्टिस ठाकुर ने सुलभ स्वच्छता रथ, पेयजल एटीएम, सुलभ स्वास्थ्य केंद्र, सार्वजनिक शौचालय, बायोगैस प्लांट, बायोगैस लैंप, बायोगैस आधारित किचन, बायोगैस जेनरेटर, एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, सुलभ पब्लिक स्कूल, इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग सेंटर, सुलभ सेनेटरी प्रोडक्शन यूनिट, सुलभ स्लम वेलफेयर यूनिट, सुलभ इंटरनेशनल टॉयलेट म्यूजि़यम और सुलभ शौचालय के 'टू-पिट पोर फ्लश कंपोस्ट टॉयलेट मॉडलÓ समेत विभिन्न मॉडल्स का अवलोकन किया। इस दौरान जस्टिस ठाकुर ने कहा कि मैं तो समझता था सुलभ शायद सिर्फ सेनिटेशन या हाईजीन के बारे में ही काम करता है। लेकिन आज मुझे यहां आकर पता चला कि यह और भी कई काम कर रहा है, जो काफी बेहतरीन और तारीफ के काबिल है। सुलभ आगमन के दौरान जस्टिस ठाकुर सुलभ प्रार्थना में भी शामिल हुए और सुलभ एंथम सुना।

गांव वालों के छलके खुशी के आंसू

दिल्ली से लगभग 800 किमी दूर जम्मू के दुर्गम और बर्फीले इलाके उखरैल से आई रुबिना के चेहरे पर उत्साह और आंखों में खुशी के आंसू थे। वहीं रजि़या के चेहरे पर खुशी का ठिकाना नहीं था। इन सबकी खुशी का कारण था उनके अपने गांव के इतने बड़े आदमी से मिलने का और साथ में दिल्ली देखने का। उन्होंने बताया कि वह पहली बार दिल्ली आई हैं। कुछ ऐसी ही खुशी और मुस्कान जस्टिस ठाकुर के चेहरे पर भी देखने को मिल रही थी। अपने गांववालों से मिलकर वह अभिभूत हो गए। गांववालों से न केवल उन्होंने अपनी स्थानीय भाषा में बातचीत की, बल्कि उन सभी लोगों को अपने आवास पर शाम की चाय के लिए आमंत्रित भी किया। गांववालों से सुलभ द्वारा किए जा रहे काम की तारीफ सुनकर जस्टिस ठाकुर ने सुलभ के प्रणेता डॉ. पाठक का आभार जताया।

वृंदावन की विधवाओं का कुशलक्षेम पूछा

वर्ष 2012 में सुप्रीम कोर्ट के आग्रह पर सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक ने वृंदावन की विधवाओं को नारकीय जीवन से निकालने का जो बीड़ा उठाया था, उसके सुखद परिणाम सुलभ कैंपस में विधवाओं के चेहरे पर मुस्कान को देखकर मिल रहा था। वृंदावन से आई महिलाओं से जस्टिस ठाकुर ने उनका कुशलक्षेम पूछा। उनके बारे में जानकारी जुटाई और सुलभ द्वारा दी जा रही सुविधाओं के बारे में विस्तार से बात की। विधवा मांओं के चेहरे पर मुस्कान को देखकर जस्टिस ठाकुर ने कहा, 'वृंदावन से आई हुई इन मांओं-बहनों को खुश देखकर और राधे-राधे सुनकर मुझे भी बहुत खुशी मिल रही है। आप लोग खुश हैं आपका ख्याल रखा जा रहा है। यह बहुत बड़ी बात है। पाठक साहब ने जिम्मेदारी लेकर और उसका बेहतर निर्वहन कर मिसाल पेश की है।



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