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शनिवार, 22 सितंबर 2018

भीगी हुई लड़की उपन्यास का लोकार्पण

`भीगी हुई लड़की' उपन्यास में भारतीय समाज की ज्वलंत समस्या का चित्रण है

 डॉ. मधुकर गंगाधर के उपन्यास 'भीगी हुई लड़की' के लोकार्पण समारोह में अपने वक्तव्य में डॉ. विन्देश्वर पाठक ने यह बात कही। समारोह नई दिल्ली के साहित्य अकादेमी सभागार में १० जनवरी, २०१७ को मुकुल प्रकाशन द्वारा आयोजित किया गया।

डॉ. पाठक ने बताया कि डॉ. मधुकर गंगाधर का यह दसवाँ उपन्यास शुरू से अंत तक पाठकों को बाँधे रखता है और यह कौतूहल बनाए रखता है कि कहानी में आगे क्या होनेवाला है।  डॉ. मधुकर गंगाधर ने अपने उपन्यास में नारी के प्रति पुरुष के भोग-विलास वाले दृष्टिकोण को दर्शाया है और इसके साथ ही इसमें अनेक सामाजिक समस्याओं का भी चित्रण किया है।  डॉ. गंगाधर ने अपने उपन्यास के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों को दूर करने के लिए लोगों का आह्वान किया है।

डॉ. विन्देश्वर पाठक ने डॉ. गंगाधर को उनकी इस नवीन कृति के लिए हार्दिक बधाई देते हुए उन्हें निरंतर लेखनरत रहने के लिए अपनी शुभकामनाएँ दीं।

कार्यक्रम में डॉ. नंदलाल मेहता 'वागीश', डॉ. हरीश नवल, डॉ. वरुण कुमार तिवारी, डॉ. ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, डॉ. कुमुद शर्मा, श्री महेश दर्पण, सुश्री सपना जैन एवं श्रीमती संगीता रघुवंशी ने भी अपने विचार रखे। डॉ. मधुकर गंगाधर ने अपने लेखकीय वक्तव्य में कहा कि मैं समय का स्टेनोग्राफर हूँ, जो देखता हूँ, वही लिखता हूँ।



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