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बुधवार, 19 जून 2019

सुलभ प्रणेता डॉ. पाठक को 'जीवन गौरव सम्मान'

समाज के प्रति अमूल्य योगदान के लिए डॉ. विन्देश्वर पाठक को भाजपा नेता और महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने सम्मानित किया

डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय औरंगाबाद ने 23 अगस्त 2018 को अपना 60 वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति, प्रोफेसर बी.ए. चोपडे ने सुलभ सैनिटेशन और सामजिक सुधार आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को समाज के प्रति उनके योगदान के लिए ‘जीवन गौरव सम्मान’ से नवाजा और उन्हें एक स्मृति चिन्ह, मानपत्र और शाल भेंट की। भाजपा नेता और महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष हरिभाऊ बागडे ने डॉ. पाठक को यह प्रतिष्ठित सम्मान दिया।
विश्वविद्यालय हर साल उन प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को ‘जीवन गौरव सम्मान’ से सम्मानित करता है, जो सामाजिक, शैक्षणिक, चिकित्सा, पर्यटन और पत्रकारिता आदि के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
पुरस्कार ग्रहण करते हुए अपने संबोधन में डॉ. पाठक ने विश्वविद्यालय, प्रोफेसर बीए चोपडे और पुरस्कार स्क्रीनिंग कमेटी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने खुद को यह पुरस्कार और विशेष पहचान देने के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा, ‘मैं विनम्र और आभारी हूं, क्योंकि यह सम्मान सामाजिक कार्यों और मानवता की सेवा करने के लिए मेरी प्रतिबद्धता को और अधिक मजबूत करेगा।’  
डॉ. पाठक ने कहा कि वह उत्साहित महसूस कर रहे हैं, क्योंकि यह पुरस्कार उन्हें उस शैक्षणिक उत्कृष्टता के केंद्र द्वारा दिया जा रहा है, जिसका नाम आधुनिक भारत के सबसे महान बेटों में से एक डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर रखा गया है। आंबेडकर, पीड़ित और दबे-कुचले समाज के सबसे बड़े मुक्तिदाता थे।
मानवतावादी डॉ. पाठक ने आगे कहा, ‘मैं उन सभी चीजों का समर्थन करता हूं जो हमारे प्यार, करुणा और मानवता की समझ को गहरा करते हैं। यह मेरे जीवन दर्शन और सक्रिय समाजशास्त्र को सहारा देता है और मजबूत बनाता है। मैं जितना कुछ करने में सक्षम हूं, यह मुझे उससे और अधिक करने की ताकत देते हुए और अधिक योग्य बनाता है। कुछ लोग कहते हैं कि सभी के लिए प्यार और करुणा के मेरे आदर्श ने ही मुझे असंभव चीजों को संभव बनाने का अधिकार दिया है, ठीक उसी तरह जैसे मैला ढोने वालों को घृणित कार्य से मुक्त कराना और विधवाओं को दुःख से भरे जीवन से बाहर निकालना संभव हो पाया। वैसे भी, मैं दुखी लोगों के लिए प्यार और करुणा के बिना, कुछ भी बड़ा और बेहतर करने में सक्षम नहीं हो पाता। मैं दिल की गहराई और बेहद जुनून से एक ऐसा भारतीय माहौल चाहता हूं जो स्वस्थ हो, एक ऐसा भारतीय समाज चाहता हूं जो सामंजस्यपूर्ण हो और एक ऐसा भारतीय दिल चाहता हूं जो सबके लिए प्यार और करुणा से भरा हुआ हो।’
स्वच्छता के अग्रदूत डॉ. पाठक ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा, ‘डॉ. आंबेडकर का नाम आशावाद को दिखाता है, साथ ही यह उम्मीद देता है कि हमारे भारतीय समाज का भविष्य हमारे जाति से भरे अतीत से बेहतर और उज्ज्वल होगा। मुझे उम्मीद है कि विश्वविद्यालय के 60 वें स्थापना दिवस का यह उत्सव सामाजिक सेवा और राष्ट्रीय कल्याण के लिए हमारे युवा छात्रों और विद्वानों को प्रेरित और उत्साहित करेगा।’
इसके साथ ही इस मौके पर डॉ. पाठक ने अपने व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन, संघर्ष और उपलब्धियों के कुछ पहलुओं को भी साझा किया, जो उपस्थित विद्वानों और छात्रों की विशिष्ट सभा के लिए खासतौर पर बड़ी सामाजिक प्रासंगिकता रखता है।
इस अवसर पर अन्य पुरस्कार विजेता सकल सोशल फाउंडेशन के अध्यक्ष और पदमश्री प्रताप पवार, प्रसिद्ध मराठी लेखक राव साहेब रंगराव बोरडे, बुलदाना शहरी सहकारी क्रेडिट सोसाइटी के अध्यक्ष राधेश्याजी चंदक, यूनेस्को के निदेशक डॉ. राजेंद्र शेंडे, नामदेव कमबल, भास्कर पेरे और तुकाराम जनपदकर गुरुजी उपस्थित थे।



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