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बुधवार, 24 अक्टूबर 2018

संध्या और सरित - इस 'आविष्कार को सलाम’

बच्चे गणित और विज्ञान का पाठ उत्सुकता से पढ़ें इसके लिए अनिवासी भारतीय संध्या और सरित का यह 'आविष्कार' बेहद अहम है

पालमपुर के सघन हरे-भरे पहाड़ों के बीच 12 वर्षीय अंजली लकड़ी और रबर से अपना स्केटबोर्ड बना रही है। कुछ ही दूरी पर लड़कों के एक समूह के साथ संध्या गुप्ता कागज का हवाई जहाज उड़ा रही हैं। वह इस माध्यम से बच्चों को व्यावहारिक तरीके से वायु-गति-विज्ञान का सिद्धांत पढ़ा रही हैं। वहीं एक बड़े हॉल में सरित शर्मा बल्ब, स्विच और प्रतिरोधकों के सहारे सर्किट बनाने का प्रयास कर रही लड़कियों के एक समूह को देख रहे हैं। 'आविष्कार' की यह पहल बेहद दिलचस्प है। जिसके सहारे बच्चे विज्ञान और गणित के कठिन पाठ को आसानी से समझ जाते हैं। 'आविष्कार' की शुरुआत संध्या और सरित ने किया। दोनों अमेरिका की आईओडब्ल्यूए स्टेट यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर चुके हैं। दोनों मिनेसोटा में शोधार्थी के रूप में कार्य कर रहे थे। अपने समाज के लिए कुछ करने की इच्छा ने ही उन्हें पालमपुर के पहाड़ों के बीच वापस ले आया। यहां आने के बाद दोनों ने पालमपुर के संभावना इंस्टीट्यूट से संपर्क किया और स्थानीय छात्रों के लिए विज्ञान के मापदंड पर काम करना शुरू कर दिया। बाद में 'आविष्कार' नाम से उन्होंने अपना केंद्र स्थापित कर लिया। इसके लिए पालमपुर रोटरी फाउंडेशन ने उन्हें सहयोग किया। संध्या और सरित ने मिलकर जिज्ञासा आधारित पद्धति और 'करके सीखने' की प्रक्रिया के माध्यम से छात्रों में वैज्ञानिक और गणितीय सोच स्थापित करने पर काम किया। 

संध्या और सरित का मानना है कि सीखने में हमेशा आनंद का अनुभव होना चाहिए। छात्रों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और गहन सोच बढ़ाने वाला होना चाहिए। प्रत्येक पाठ के लिए कहानी, दृश्य, प्रतिरूप (नमूना) आदि अटूट हिस्सा होते हैं, जहां प्रश्न पूछने तथा स्वयं समाधान विकसित करने के लिए छात्र प्रेरित होते हैं। दोनों मिलकर यहां छात्रों के लिए विज्ञान और गणित कैंप तथा शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग सेशन आयोजित करते हैं। शिक्षा से संबंधित मुद्दों से रुचि रखने वाले युवा पेशेवरों को प्रशिक्षित करने के लिए आविष्कार 'हमारी शिक्षा नाम से कार्यशाला आयोजित करता है। गैर सरकारी संगठन 'नारी गुंजन' के सहयोग से बिहार की आदिवासी लड़कियां नियमित रूप से आविष्कार द्वारा आयोजित कैंपों में प्रयोग के माध्यम से विज्ञान की परीक्षा देने के लिए आती हैं। हमारी शिक्षा व्यवस्था में लिखकर सिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है। संध्या और सरित ने प्रभावी रूप से दिखाया है कि शिक्षा कभी भी सिर्फ पाठ्य पुस्तकों तक सीमित नहीं होना चाहिए। उनके प्रयास से न केवल हजारों छात्रों की विज्ञान संबंधी सोच बदली है, बल्कि इन्होंने उपयुक्त मॉडल भी बनाया है ताकि हर कोई और उसे अपना सके।



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