sulabh swatchh bharat

सोमवार, 23 अप्रैल 2018

नेशनल एजेंडा है एजुकेशन

भारत में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता को सुधारने के लिए मोदी सरकार ने जो पहल की है, उसके नतीजे सामने आने लगे हैं

'सिर्फ विषय का ज्ञान शिक्षा नहीं है, शिक्षा के जुनून को जिंदा रखना ही असली शिक्षा होती है। राइट टू एजुकेशन के बाद करीब 98 फीसदी बच्चे स्कूल पहुंच चुके हैं। लेकिन अब एजुकेशन में क्वालिटी की जरूरत है,  ये कहना है मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर का। पिछले दिनों शिक्षा को नेशनल एजेंडा बताते हुए उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में होने वाले सुधारों और कई बदलावों की बात की। प्राइमरी एजुकेशन में इनोवेशन को बढ़ावा देने के साथ उच्च शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने पूरी तैयारी कर ली है। टीएसआर सुब्रह्मïण्यम समिति द्वारा तैयार 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016  के प्रारूप (ड्राफ्ट) में प्राइमरी एजुकेशन से लेकर हायर एजुकेशन में बेहतरीन बदलाव लाने के लिए कई अहम सिफारिशें की गई हैं। इसके साथ ही देश में उच्च शिक्षा में सुधार के लिए भी कई आमूलचूल परिवर्तन किए जा रहे हैं।

विश्वस्तरीय होगी उच्च शिक्षा

शोध और उच्च शिक्षा के लिए भारत में हालात बहुत अच्छे नहीं रहे हैं। इस वजह से हर साल लगभग ढाई से तीन लाख भारतीय युवा अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों की तरफ रुख करते हैं। लेकिन युवा बहुल भारत के युवाओं के लिए बेहतर उच्च शिक्षा को ध्यान में रखते हुए और 'ब्रेन ड्रेन  की समस्या के समाधान के लिए मोदी सरकार ने काफी गंभीरता से कदम बढ़ाना शुरू किया है। इसके लिए देश में 20 (10 सरकारी और 10 निजी) विश्वविद्यालयों को विश्वस्तरीय बनाया जा रहा है। उच्च शिक्षा में सुधार के लिए 'उच्चतर आविष्कार योजना  (यूएवाई), 'इम्पैक्टिंग रिसर्च इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी , 'एजुकेशन फाइनांसिग एजेंसी , 'ग्लोबल रिसर्च इंटरैक्शन नेटवर्क  और 'ग्लोबल इनिशिएटिव ऑफ एकेडमिक नेटवर्क  (जीआईएएन) प्रोग्राम की शुरुआत की गई है। जीआईएन के तहत विदेशी यूनिवर्सिटी के 600 विशेषज्ञ प्रोफेसरों को देश के प्रमुख संस्थानों

में गेस्ट लेक्चरर के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 90 फीसदी तक स्वायत्तता दी जाने की योजना है। पिछले साल उच्च शि‍क्षा पर पौने दो लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं और इस वर्ष इसे और बढ़ाया जाएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री का कहना है कि वर्तमान में देश की जीडीपी का लगभग चार फीसदी शिक्षा पर खर्च किया जा रहा है, जिसमें से 1.4 प्रतिशत उच्च शिक्षा पर खर्च होता है। इस वर्ष से इसे बढ़ाकर 6 फीसदी तक किया जाएगा। सरकार के प्रयासों का कुछ हद तक असर देखने को मिलने भी लगा है। रिजर्व बैंक की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले चार साल में पहली बार उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या घटी है। रिजर्व बैंक के आंकड़ो के मुताबिक भारतीयों ने 2015-16 में विदेश में पढ़ाई पर

1.98 अरब डॉलर खर्च किए हैं जबकि इसके पिछले वर्ष में यह आंकड़ा 2.47 अरब डॉलर था। ऐसे में विदेश में पढ़ाई पर होने वाले खर्च में 20 फीसदी की कमी आई है। दरअसल, पिछले आठ सालों में 15 नए आईआईटी, दर्जन भर नए आईआईएम और कई अन्य प्रतिष्ठित संस्थान खोले गए हैं। इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च, नेशनल

इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी और उच्च गुणवत्ता वाले केंद्रीय और निजी विश्वविद्यालयों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है। इसका सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहा है। सरकार जिस तरह से

उच्च शिक्षा को लेकर गंभीर है, उससे वर्ष 2017 में और उसके बाद देश को ब्रेन ड्रेन की समस्या से निजात तो मिलेगी ही साथ ही निश्चित रूप से देश की उच्च शिक्षा भी विश्वस्तरीय बनेगी। 



Bringing smiles to every face hindi ad copy %281%29

ऑडियो