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गुरुवार, 20 जून 2019

‘स्वच्छता के पितामह’ को ‘लीजेंड पुरस्कार’

डॉ. पाठक के काम ने लाखों वंचितों के जीवन में बड़ा बदलाव पैदा किया है और देश में स्वच्छता संबंधी बुनियादी ढांचे को सुधारने के उनके प्रयासों ने भी बड़ा काम किया है

‘सुलभ स्वच्छता आंदोलन के पितामह’ डॉ. विन्देश्वर पाठक, सही मायने में एक सच्चे लिविंग लीजेंड हैं। वह पिछले पांच दशकों से अपने जीवन को स्वच्छता आंदोलन के लिए समर्पित कर देने की वजह से देश-विदेश में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजर्स (मैला ढोने वाले) के मानवाधिकारों के लिए अथक काम किया है, जो शुष्क शौचालयों को साफ करते हैं और भारत की जाति-आधारित व्यवस्था के सबसे निचले स्तर से आते हैं, जिनमें भी ज्यादातर महिलाएं हैं।
फिनोवेशन ने अपने 10 वें फाउंडेशन दिवस समारोह में नई दिल्ली के होटल हयात रीजेंसी में सुलभ स्वच्छता और सामाजिक आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक को ‘द लीजेंड अवार्ड’ से सम्मानित किया। डॉ. पाठक को यह सम्मान देश में स्वच्छता के बुनियादी ढांचे को सुधारने और शौचालय की सुविधा देश में अधिकतर जगहों तक पहुंचाने के लिए दिया गया है।
पुरस्कार प्राप्त करते हुए डॉ. पाठक ने इस अवसर पर कहा कि मुझे विश्वास है कि जो व्यक्ति आपकी प्रशंसा कर रहा है वह उस व्यक्ति से बड़ा है जिसकी सराहना की जा रही है। ऐसा इसीलिए है क्योंकि लोगों के काम की सराहना और उन्हें ऊपर उठाना बहुत मुश्किल है। मेरे इस विशेष पुरस्कार और प्रशंसा के योग्य होने पर विचार करने के लिए फिनोवेशन परिवार, विशेष रूप से इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सौमित्र चक्रवर्ती, और इसकी विशिष्ट ज्यूरी का आभारी हूं।
डॉ. पाठक ने कहा, ‘मैं दिल से सम्मानित महसूस कर रहा हूं और मैं उन्हें आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह पुरस्कार मानवता और स्वच्छता के लिए और अधिक काम करने की मेरी भावना और प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।’
उन्होंने आगे कहा, ‘भारत की सांस्कृतिक बहुलता की अपनी समझ के आधार पर, मैंने समस्याओं के समाधान के लिए एक आदर्शवादी और व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की कोशिश की है। समाज के सभी वर्गों को एक साथ लेकर कट्टरपंथी चीजों को एक सुधारवादी खांचे में ढालने की कोशिश की है। मैं एक तरह का आलोचनात्मक परंपरावादी हूं, क्योंकि मैं अपनी परंपरा के मूल्यों का आभारी हूं जो हमारे बीच प्यार, करुणा और मानवता को बढ़ाता है। लेकिन परंपरा में समाई समाज को तोड़ने वाली रुढ़िवादी व्यवस्था से शर्मिंदा हो जाता हूं जो हमें विभाजन की ओर ले जाती है। मुझे लगता है कि अंतर्निहित मानसिकता और सामाजिक पूर्वाग्रह को बदलना मुश्किल है, लेकिन अतीत में ही रहना एक खतरनाक जीवन है। जीवंत और रचनात्मक होने के लिए, व्यक्ति और समाज को नए विचारों और नई गतिविधियों की आवश्यकता होती है। इस तरह की सोच, चाहे मूल-प्राचीन हो या आधुनिक, चाहे पूर्वी हो या पश्चिमी होने के बावजूद, मुझे गले लगाने को विवश करती है। इस प्रकार, मैं एक परंपरावादी और आधुनिकतावादी दोनों हूं, पूरी तरह से एक ऐसा सामाजिक व्यक्ति जिसकी जड़ें भारतीय मिट्टी में समाई हुई है, लेकिन उसने अपने दरवाजे और खिड़कियां हर आधुनिक सोच के लिए खुली रखी हैं।’
कुछ लोग कहते हैं कि समाज के हर तबके के लिए प्यार और करुणा के मेरे आदर्श ने मुझे असंभव चीजों को भी करने का अधिकार दे दिया है- जैसे कि मैला ढोने वालों को इस घृणित कार्य से मुक्त कराना और विधवाओं के दुःख भरे जीवन में खुशियां भरना। वैसे भी, मैं लोगों के प्यार और करुणा के बिना कुछ भी बेहतर करने में सक्षम नहीं होता। मैं अपने दिल की गहराई से एक ऐसा भारतीय वातावरण चाहता हूं जो स्वस्थ हो, सामंजस्यपूर्ण हो और प्रेम और करुणा से भरा हुआ हो।
इस समारोह में डॉ. पाठक को प्रसिद्ध चेंज मेकर्स (जो बदलाव लाए) डॉ. एमएस स्वामीनाथन और डॉ. भास्कर चटर्जी के साथ सम्मानित किया गया।

एक सच्चे लिविंग लीजेंड
फिनोवेशन के सीईओ डॉ. सौमित्र चक्रवर्ती ने इस मौके पर कहा, ‘यदि आप इन तीनों व्यक्तियों को देखें, तो आपको एक ऐसे युग का एहसास होगा जहां कोई सोशल मीडिया नहीं था। उन्होंने वास्तव में सभी बाधाओं के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया। प्रतिरोध की उस प्रक्रिया और उस दौरान दिखाए गए उत्साह व साहस को मनाने के लिए ही आज हम इकट्ठा हुए हैं।’
सौमित्र चक्रवर्ती ने कहा कि डॉ. पाठक के काम ने उन लाखों वंचित गरीबों के जीवन में महत्वपूर्ण अंतर पैदा किया है, जिनके पास व्यक्तिगत शौचालयों की सुविधा नहीं थी और जो मैनुअल स्कैवेंजर्स के रूप में काम करते हुए समाज में भेदभाव का सामना करते थे।
उन्होंने कहा कि डॉ. पाठक का मानना है कि एक ऐसी सामाजिक प्रणाली जो समावेशी नहीं है, उसे बदला जाना चाहिए। वह राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान चलाते हैं, जो मैला ढोने वालों की दुर्दशा को उजागर करता है, साथ ही वह लंबे समय से समाज में उपेक्षित विधवाओं की स्थिति बदलने के लिए काम कर रहे हैं ताकि वे समाज में आम लोगों की तरह जीवन जी सकें और जिंदगी के रंग देख सकें।

प्रेरणा का मेरा स्रोत
डॉ. भास्कर चटर्जी ने अपने भाषण के दौरान पिछले 50 वर्षों में डॉ. पाठक द्वारा किए गए निःस्वार्थ काम की सराहना की और कहा, ‘आप सीएसआर की मेरी पूरी यात्रा में प्रेरणा थे और हैं। आपके साथ एक मंच साझा करके और पुरस्कार ग्रहण करके विशेषाधिकार महसूस करता हूं। डॉ. पाठक ने स्वच्छता के क्षेत्र में देश का नेतृत्व किया। महात्मा गांधी के साथ डॉ. पाठक का संबंध लगभग प्राकृतिक है। महात्मा गांधी जो कार्य शुरू किया, डॉ. पाठक ने उसे आगे बढ़ाया है। वह एक सच्चे गांधीवादी हैं।’

भारतीय हरित क्रांति के पिता
मकबू सांबशिवन स्वामीनाथन (जन्म 7 अगस्त 1925) भारत की हरित क्रांति के जनक हैं। वह एक प्रसिद्ध आनुवांशिकी विज्ञानी और अंतरराष्ट्रीय प्रशासक है। हरित क्रांति के अंतर्गत गरीब किसानों के खेतों में गेहूं और चावल के रोपण की उच्च पैदावार वाली किस्में लगाई गईं। स्वामीनाथन को भारत में गेहूं की उच्च पैदावार वाली किस्मों को शुरू करने और आगे बढ़ाने में उनके नेतृत्व और सफलता के लिए ‘भारतीय हरित क्रांति के जनक’ के रूप में जाना जाता है।

कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के सूत्रधार
डॉ. भास्कर चटर्जी को हमारे देश में ‘कॉरर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर)’ के सूत्रधार के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अप्रैल, 2010 में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसई) के लिए सीएसआर दिशानिर्देश तैयार करने और जारी करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद, उन्होंने 2013 के कंपनी अधिनियम में धारा 135 को शामिल करने और उसके बाद के नियमों के निर्माण में एक प्रमुख भूमिका भी निभाई। आज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) के डीजी और सीईओ के रूप में, वह कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (एनएफसीएसआर) के लिए राष्ट्रीय फाउंडेशन का नेतृत्व करते हैं।
इनोवेशन फाइनेंस एडवाइजर प्राइवेट लिमिटेड (फिनोवेशन) एक वैश्विक परामर्श कंपनी है, जो कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) और सस्टेनेबिलिटी पर जोर सहित ‘सामाजिक विकास क्षेत्र’ के कई विषयों में काम कर रही है।



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