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बुधवार, 21 नवंबर 2018

मुसहर बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा

मुसहर समाज की स्थिति सामाजिक और शैक्षणिक दोनों ही दृष्टि से काफी दयनीय रही है। बिहार के जहानाबाद और मसौढ़ी जिले में स्वयंसेवी संस्था 'अभियान’ की तरफ से इस समाज के बच्चों के बीच शिक्षा का प्रकाश फैलाने का एक बड़ा काम हो रहा है। संस्था के संस्थापक चंद्रभूषण इस शिक्षा के साथ इस समाज के सर्वांगीण विकास को अपना मिशन मानते हैं

'भइया जी! स्कूलवा में कब नममा लिखतई। टोलवन के सब लड़कवन स्कूलवा जाय लगलई, ...त हमर लड़कवा काहे न पढ़तई 'यह मार्मिक आवाज मुसहर समाज के लाल बिहारी मांझी या मीना पासवान भर की नहीं, बल्कि चारों ओर से उठ रही है। दरअसल, मुसहर बिहार की एक अनुसूचित  जन जाति है, जो लोग पारंपरिक तौर पर खेतों से मूसा (चूहा) पकड़ कर उसी को आहार बनाते रहे हैं। शायद इसीलिए उन्हें मुसहर कहा जाता है।

आज़ादी के बाद भी अनुसूचित जन जातियों में मुसहर समाज वर्षों तक शिक्षा से वंचित रहा है। 2005 में पूरे भारत में सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत देश के सभी राज्यों में प्राथमिक शिक्षा पर जोर दिया गया। जिस कारण गांव-टोले प्राथमिक विद्यालय से जुडऩे लगे। इस प्रकार शिक्षा का प्रसार धीरे-धीरे होने लगा। शिक्षा को मौलिक अधिकार में जोडऩे के बाद अनुसूचित जन जातियों में भी शिक्षा के प्रति जागृति आने लगी। पर यह जागृति जिनके बीच आज भी सबसे कम है, वह मुसहर समाज है। इसके पीछे सामाजिक और आर्थिक कारण तो हैं ही, इस समाज की अपनी रूढिय़ां भी इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार हैं। 

मुसहर समाज को शिक्षा के क्षेत्र में ऊपर लाने में सरकार के सहयोगी के रूप में देश के अन्य सूबों की तरह बिहार में कई गैर सरकारी संस्थाएं लगातार योगदान दे रही हैं। 2009 में शिक्षा को मौलिक अधिकार से जरूर जोड़ दिया गया, पर यह जुड़ाव इस समाज के बीच पुख्ता होना अभी बाकी है।

   'अभियान’ एक स्वयंसेवी संस्था है, जिसके संचालक चंद्रभूषण करीब दो दशक से लगातार इस समाज के लोगों के बीच काम कर रहे हैं। मुसहर समाज की उन्नति को लेकर जमीनी स्तर पर कुछ करने की ललक ने उन्हें बिहार के जहानाबाद जिले को एक प्रयोगस्थली के तौर पर चुनने को विवश किया। आज की तारीख में वे इस जिले के काको प्रखंड के 35 गांवों और पटना जिला के मसौढ़ी प्रखंड के 25 गांवों में समाज के अंतिम व्यक्ति के रूप में मुसहर समाज के बीच में शिक्षा के साथ उनके स्वावलंबन के लिए काम कर रहे हैं।

काम शुरू करने से पहले 'अभियान’ ने मुसहर बाहुल्य 60 गांवों में जाकर उनकी स्थिति का पहले अध्ययन किया। फिर चरणबद्ध तरीके से उन्हें मनरेगा एवं सामाजिक सुरक्षा की योजनाओं के तहत काम दिलाने का प्रयास किया। मुसहर बच्चों में शिक्षा के प्रसार के लिए उन्होंने खासतौर पर आंगनबाड़ी केंद्रों की मदद ली। आज स्थायी रूप से 1685 मुसहर समाज के बच्चे सरकारी विद्यालय या आंगनबाड़ी में जा रहे हैं। इस अति पिछड़े समाज को शिक्षा की मुख्यधारा से जोडऩे का यह काम इस लिहाज से काफी अहम है कि इससे इस समाज में एक नए तरह के आत्मविश्वास को बनाने में मदद मिल रही है। जो बच्चे किसी कारण से न तो आंगनबाड़ी केंद्र में जा पा रहे हैं और न ही जिनका सरकारी स्कूलों में दाखिला हुआ है, उन्हें 'अभियान’ की तरफ से अलग से खोले गए सपोर्ट सेंटरों पर पढ़ाया जा रहा है। संस्था द्वारा जहानाबाद जिले के काको प्रखंड के नौ मुसहर बाहुल्य गांव तिताई बिगहा, रतन बिगहा, लटनपटी, गोलकपुर, सलेमपुर, भदसारा, कोसियावां, फिरोजी, उसरी के 400 मुसहर परिवारों के 396 बच्चों को स्कूल की अवधि समाप्त हो जाने के बाद वहीं खोले गए सपोर्ट सेंटर में साक्षर व शिक्षित किया जा रहा है। यह एक अनूठा प्रयोग है, जिसमें सरकारी स्कूलों के भवनों का शिक्षा के लिए अलग से प्रयोग हो रहा है। 

मुसहर समाज के सर्र्वांगीण विकास में लगे चंद्र्रभूषण  और उनकी संस्था शिक्षा के इस बड़े मिशन के अलावा मुसहर समाज के सशक्तिकरण के लिए और भी कई पहल को अंजाम दे रहे हैं। अभी तक इस समाज के लोग यह समझते थे कि उन्हें सिर्फ मजदूरी करना है, लेकिन अब आंगनबाड़ी विकास समिति में सदस्य बनने के लिए उन्हें प्रेरित किया जा रहा है। मुंदर देवी, सोनामति और शांति देवी जैसी स्थानीय मुसहर महिलाएं आंगनबाड़ी विकास समिति का सदस्य बनकर अपने बीच चल रही कल्याणकारी कार्यक्रमों में खुद हाथ बंटा रही हैं। इससे इस पूरे क्षेत्र में एक जागरूक माहौल बना है। तिताई बिगहा के महेश्वर मांझी जैसे कई युवक टोला सेवक बनकर प्राथमिक विद्यालय में चल रहे सपोर्ट सेंटर को चलाने में मदद कर रहे हैं।

मुसहर समाज के बीच शिक्षा का अलख कितना जरूरी है, इसका अहसास इस बात से हो सकता है कि लटनपट्टïी जैसे गांव में इस समाज का मात्र एक व्यक्ति स्नातक है। इससे नीचे भी स्थिति यह है कि इंटर तक की तालीम पाने वाला भी इस समाज में सिर्फ एक ही व्यक्ति है। चंद्र्रभूषण बताते हैं, 'मुसहर समाज में उनके प्रयासों के बाद एक नई चेतना आई है। लटनपट्टïी की पुनिया देवी जहां वार्ड सदस्य का तो वहीं राजमती देवी मुसहर समाज की तरफ से पहली बार पंच का चुनाव जीती हैं। लटनपट्टïी की रेखा देवी स्कूल प्रबंधन समिति में शामिल हुई हैं, तो गीता देवी आंगनबाड़ी विकास समिति में मुसहर जाति का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।’ जाहिर है कि इस तरह की सफलताओं से आज यह समाज न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ रहा है, बल्कि उनका मनोबल भी तेजी से बढ़ रहा है।



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