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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

रामनारायण रूईया कॉलेज - पान के दाग से छुटकारा

मुंबई की छात्राओं ने निकाला पान के दाग छुड़ाने का आसान तरीका

पान के दाग को मिटाना आसान नहीं है, लेकिन मुंबई के रुईया कॉलेज की युवा शोधकर्ताओं के समूह ने इसे आसान कर दिया है। छात्राओं ने जैविक संश्लेषण के आधार पर पर्यावरण-पूरक एक तरीका खोज निकाला है। कॉलेज की प्रध्यापिका डॉ. मयूरी रेगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुद इसकी जानकारी दी। छात्राओं को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ से इस तरह के शोध के लिए प्रेरणा मिली है। 
मुंबई को अपने उपनगरीय रेलवे स्टेशनों की इमारतों और लोकल के डिब्बों में पान के दाग को साफ करने के लिए हर महीने करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। नई खोज से ये दाग आसानी से छूट जाएंगे।  इस शोध परियोजना में ऐश्वर्या राजूरकर, अंजली वैद्य, कोमल परब, निष्ठा पांगे, मैथिली सावंत, मीताली पाटील, सानिका आंबरे और श्रृतिका सावंत शामिल थीं। मुख्यमंत्री ने इन छात्राओं से मुलाकात की। आठ छात्राओं की टीम का डॉ. अनुश्री लोकुर, डॉ. मयूरी रेगे, सचिन राजगोपालन और मुग्धा कुलकर्णी ने मार्गदर्शन किया था। इन छात्राओं के प्रतिनिधित्व से उनके कॉलेज को अमेरिका के बॉस्टन स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) की तरफ से आयोजित विश्व शोध प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल मिला है। इसमें विश्वभर में 300 से अधिक टीम शामिल हुई थीं।



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