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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

असमा जहांगीर - मानवाधिकार की असमा

पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता को मरणोपरांत संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार पुरस्कार प्रदान किया गया

प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता असमा जहांगीर का पिछले वर्ष दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया था। उन्हें इस वर्ष दिसंबर में संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार पुरस्कार दिया जाएगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष मारिया फर्नैंडा एस्पिनोसा गार्सेस ने हाल में इसकी घोषणा की। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है, जिन्होंने मानवाधिकार के क्षेत्र में बेहतरीन काम किया है। इसे पाने वालों में मार्टिन लूथ किंग, नेल्सन मंडेला और जिमी कार्टर जैसी हस्तियां शामिल हैं। 
असमा पाकिस्तान के उन चुनिंदा सामाजिक कार्यकर्ताओं में शुमार होती थीं जो सत्ता-संस्थानों के अन्याय के खिलाफ खुलकर बोलते थे, खास तौर पर सैन्य तानाशाही की तो वे मुखर विरोधी थीं। बहुत- सी लड़ाइयां वे अदालतों में ले गईं जो अब कानूनी इतिहास का हिस्सा बन चुकी हैं। मसलन 1972 का जिलानी बनाम पंजाब सरकार मामला। तब पाकिस्तान में याह्या खान के नेतृत्व में सैन्य शासन लागू था। सरकार ने असमा के पिता को कैद कर लिया था। इसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी और अदालत ने सैन्य शासन को ‘अवैधानिक’ घोषित कर दिया था। असमा जहांगीर जनरल जिया-उल-हक के सैन्य शासन के खिलाफ भी लड़ीं। उस वक्त उनका घर ऐसे लोगों का बड़ा जमावड़ा बन चुका था, जिनके खिलाफ सरकार ने तमाम मुकदमे खोल दिए थे। इस संघर्ष में उन्हें जेल तक जाना पड़ा। पिछले वर्ष 11 फरवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया था।



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