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शुक्रवार, 19 अप्रैल 2019

गौहर जान - ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’

गौहर जान भारत की पहली गायिका थीं, जिन्होंने अपने गाए गानों की रिकॉर्डिंग कराई। यही वजह है कि उन्हें ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’ का दर्जा मिला

भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार गौहर जान के 145वें जन्म दिवस के मौके पर गूगल ने डूडल बनाकर उन्हें विशेष रूप से याद किया। गौहर भारत की उन महान हस्तियों में से एक थीं, जिन्होंने न सिर्फ भारतीय संगीत को नई बुलंदियों पर पहुंचाया बल्कि दुनियाभर में देश का सिर भी गर्व से ऊंचा किया। 26 जून 1893 को जन्मीं भारतीय सिनेमा की मशहूर गायिका का असली नाम एंजलिना योवर्ड था। वह भारत की पहली गायिका थीं, जिन्होंने अपने गाए गीतों की रिकॉर्डिंग कराई। यही वजह है कि उन्हें ‘भारत की पहली रिकॉर्डिंग सुपरस्टार’ का दर्जा मिला है।

बचपन में उत्पीड़न
भारतीय शास्त्रीय संगीत को शिखर पर पहुंचाने वाली गौहर की जिंदगी के पन्ने खोलते हुए यह अहसास होता है कि उनके लिए जिंदगी में कामयाबी का मुकाम हासिल करना इतना आसान नहीं था। गौहर महज 13 साल की उम्र में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई थीं। इस सदमे से उबरना उनके लिए आसान नहीं था, पर संघर्ष और लगन के साथ संगीत की दुनिया में अपना सिक्का जमाने में वह कामयाब हुईं। गौहर की कहानी 1900 के शुरुआती दशक में महिलाओं के शोषण, धोखाधड़ी और संघर्ष की कहानी है। गौहर की कहानी को विक्रम संपत ने सालों की रिसर्च के बाद ‘माई नेम इज गौहर जान’  किताब के जरिए सबके सामने रखा। उन्होंने 20 भाषाओं में ठुमरी से लेकर भजन तक गाए हैं। उन्होंने करीब 600 गीत रिकॉर्ड किए थे। यही नहीं, गौहर जान दक्षिण एशिया की पहली गायिका थीं जिनके गाने ग्रामाफोन कंपनी ने रिकॉर्ड किए। 
1902 से 1920 के बीच ‘द ग्रामोफोन कंपनी ऑफ इंडिया’ ने गौहर के हिन्दुस्तानी, बांग्ला, गुजराती, मराठी, तमिल, अरबी, फारसी, पश्तो, अंग्रेजी और फ्रेंच गीतों के छह सौ डिस्क निकाले थे। उनका दबदबा ऐसा था कि रियासतों और संगीत सभाओं में उन्हें बुलाना प्रतिष्ठा की बात हुआ करता थी।

असली नाम एंजेलिना
गौहर जान का असली नाम एंजेलिना योवर्ड था। उनका जन्म आजमगढ़ में हुआ था। उनके पिता इंजीनियर थे तो मां विक्टोरिया संगीत और नृत्य में प्रशिक्षित थीं और यहीं से गौहर जान यानी एंजेलिना को डांस और संगीत का चस्का लगा। 1879 में एंजेलिना की मां की शादी टूट गई, जिसके बाद वह बनारस आ गईं। गौहर की मां विक्टोरिया जन्म से भारतीय थीं। अपने पति से तलाक होने के बाद विक्टोरिया अपनी 8 साल की बच्ची एंजेलिना को लेकर बनारस चली गई थीं, जहां उन्होंने इस्लाम धर्म अपना लिया और नाम रखा...’खुर्शीद’। मां के साथ साथ गौहर का भी धर्म बदला गया और वो एंजेलिना से गौहर बन गईं। एंजेलिना से गौहर बनने वालीं इस कलाकार का अधिकतर काम कृष्ण भक्ति पर है।

भारत में पहली रिकॉर्डिंग
वह दक्षिण एशिया की पहली ऐसी सिंगर थीं, जिनके न सिर्फ गाने ग्रामोफोन कंपनी ने रिकॉर्ड किए, बल्कि गाने के लिए उन्हें करीब 3000 रुपए दिए गए। यह उस जमाने में बहुत बड़ी रकम थी और और इससे पहले भारतीय उपमहाद्वीप के किसी गायक ने प्रोफेशनली अपने गानों के लिए इतनी बड़ी फीस नहीं वसूली थी। भारतीय संगीत की दुनिया के लिए यह एक तारीखी घटना थी। 
1902 में ग्रामोफोन कंपनी के भारत में पहले एजेंट फ्रेड्रिक विलियम ने गौहर को पहली भारतीय आर्टिस्ट के तौर पर चुना था, जो म्यूजिक को रिकॉर्ड करे। 11 नवंबर 1902 को कोलकाता के होटल के एक कमरे को गौहर जान के लिए स्टूडियो में बदला गया था। ये भारत में पहली रिकॉर्डिंग थी। गौहर ने अपनी पहली परफॉर्मेंस 1887 में दरभंगा के रॉयल कोर्ट में दी थी। गौहर जान अपने टैलेंट के कारण काफी मशहूर हो गईं थीं और खूब शानो-शौकत से रहती थीं। अपनी हर रिकॉर्डिंग के लिए वह नए कपड़े और जेवर पहनकर पहुंचती थीं। 

‘डांसिग गर्ल’ का टाइटल
कोलकाता में 1896 में गौहर का एक बड़ा शो आयोजित हुआ था, जिसके बाद उन्हें ‘पहली डांसिग गर्ल’ का टाइटल मिला था। गौहर अपने समय की बहुत फेमस आर्टिस्ट थीं, उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उस दौर में उनकी फोटो माचिस और पोस्ट कार्ड पर भी छपती थी। 

मां का योगदान
गौहर की कामयाबी और शोहरत में उनकी मां का बहुत योगदान था। उन्होंने अपनी मां से ही नृत्य और गायन का हुनर सीखा था। वैसे गौहर ने इसके अलावा रामपुर के उस्ताद वजीर खान और कलकत्ता के प्यारे साहिब से भी गायन की तालीम हासिल की थी। गौहर चूंकि बचपन से ही प्रतिभाशाली थीं, इसीलिए जल्द ही वह ध्रुपद, खयाल, ठुमरी और बांग्ला कीर्तन गाने में पारंगत हो गईं। 

एक सौ एक गिन्नियां
19वीं शताब्दी में गौहर जान सबसे महंगी गायिकाओं में शामिल थीं। ऐसा कहा जाता है कि वह सोने की एक सौ एक गिन्नियां लेने के बाद ही किसी महफिल में जाती थीं और वहां गाती थीं। शुरुआती दिनों में गौहर बेहद अमीर महिला थीं। उनके पहनावे और जेवरात उस वक्त की रानियों तक को मात देते थे। अपनी कमाई का काफी हिस्सा उन्होंने कलकत्ता में निवेश किया, जहां उनकी कई कोठियां थीं। 
गौहर जान को जब कोई नवाब अपने यहां महफिल सजाने के लिए बुलावा भेजते तो उन्हें लाने के लिए पूरा का पूरा काफिला भेज दिया करते थे, क्योंकि वह बड़े तामझाम के साथ सफर करती थीं। वो अपने गायन और रिकॉर्डिंग उद्योग के शुरुआती दिनों में ही करोड़पति बन गईं। 

आखिरी दिनों में अकेली
पेशेवर गायकी के क्षेत्र में गौहर का जलवा 1902 से 1920 तक छाया रहा। डेढ़ दशक से ज्यादा लंबे अपने सुरीले सफरनामे में उन्होंने 600 से ज्यादा गाने गाए। आखिरी दिनों में वो बेहद अकेली हो गई थीं और गुमनामी की हालत में 17 जनवरी 1930 को उनकी मौत हुई।



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