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मंगलवार, 25 जून 2019

अक्षय ऊर्जा से जगमग देश

भारत ने विगत वर्षों में वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र में न सिर्फ तेजी से कदम बढ़ाए हैं, बल्कि इस दौरान कई बड़ी योजनागत उपलब्धियां भी हासिल की हैं

विकास के नए और टिकाऊ लक्ष्यों को पाने के लिए ऊर्जा के लिए प्रकृति का दोहन रोकना होगा। इस मुद्दे पर पूरी दुनिया में पहल का स्तर भले भिन्न हो पर सहमति एक समान है। बात करें अकेले भारत की तो भारत ने वैकल्पिक ऊर्जा क्षेत्र में न सिर्फ तेजी से कदम बढ़ाए हैं, बल्कि इस दौरान कई बड़ी योजनागत उपलब्धियां भी हासिल की हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कहते हैं कि उनकी सरकार में योजनाओं में देरी एक अपराध की तरह है। यही वजह है कि मौजूदा केंद्र सरकार जिस लक्ष्य को लेकर चलती है या तो उसे समयसीमा पर पूरा कर लेती है या कामकाज की तेज रफ्तार के चलते उससे पहले भी पूरा कर लेती है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है देश के हर गांव में बिजली पहुंचाने का लक्ष्य, जिसे तय की गई समयसीमा से पहले ही हासिल कर लिया गया। इसके अलावा अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। 

बढ़ी सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी
देश के कुल ऊर्जा उत्पादन में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ रही है, जिससे परंपरागत ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। राष्ट्रीय सौर मिशन के तहत सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य  को 20 गीगावाट से बढ़ाकर वर्ष 2021-22 तक 100 गीगावाट कर दिया गया है। वर्ष 2017-18 के लिए 10,000 मेगावाट का लक्ष्य रखा गया है। सोलर लाइटिंग सिस्टम की स्थापना में भी तेजी आई है। देशभर में 41.80 लाख से भी ज्यादा सोलर लाइटिंग प्रणालियां, 1.42 लाख सोलर पम्प  और 181.52 एमडब्ल्यूईक्यू के पावर पैक स्थापित किए गए हैं। 

175 गीगावाट की अक्षय ऊर्जा का लक्ष्य
भारत सरकार ने 2022 के आखिर तक 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा संस्थापित क्षमता का लक्ष्य  निर्धारित किया है। इसमें से 60 गीगावाट पवन ऊर्जा से, 100 गीगावाट सौर ऊर्जा से, 10 गीगावाट बायोमास ऊर्जा से एवं पांच गीगावाट लघु पनबिजली से शामिल हैं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पिछले दो वर्षों के दौरान सोलर पार्क, सोलर रूफटॉप योजना, सौर रक्षा योजना, नहर के बांधों तथा नहरों के ऊपर सीपीयू सोलर पीवी पॉवर प्लांट के लिए बड़े कार्यक्रम शुरू किए गए हैं।

पवन ऊर्जा में बड़ी उपलब्धि
भारत में पवन ऊर्जा उपकरण निर्माण का मजबूत आधार है। भारत में बनाई जाने वाली पवन टर्बाइन विश्व गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हैं और यूरोप, अमेरिका तथा अन्य देशों से आयातित टर्बाइनों में सबसे कम लागत की है। वर्ष 2016-17 के दौरान पवन ऊर्जा में 5.5 गीगावाट की क्षमता जोड़ी गई जो देश में अब तक एक वर्ष में जोड़ी गई क्षमता में सबसे अधिक है। पवन ऊर्जा क्षमता की स्थापना में भारत विश्व में चीन, अमेरिका और जर्मनी के बाद चौथे स्थान पर है।

लक्ष्य से अधिक पनबिजली 
2016-17 में 5502.39 मेगावाट की अब तक की सबसे अधिक पनबिजली क्षमता सृजन दर्ज की गई, जो लक्ष्य की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। लघु पनबिजली संयंत्रों से पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान ग्रिड कनेक्टेड नवीकरणीय ऊर्जा के तहत 0.59 गीगावाट का क्षमता सृजन किया गया है।

हर गांव तक पहुंची बिजली
भारत के इतिहास में 28 अप्रैल 2018 की तारीख एक ऐतिहासिक तिथि के रूप में दर्ज हो गई जब देश के एक-एक गांव तक बिजली पहुंचाने के मिशन को पूरा कर लिया गया। मणिपुर के लाइसंग गांव में बिजली पहुंचने के साथ ही मोदी सरकार ने इतिहास रच दिया। 25 जुलाई 2015 को शुरू की गई दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अंतर्गत देश के उन 597,464  गांवों में 1000 दिन के अंदर बिजली पहुंचाना था जिसे 13 दिन पहले ही पूरा कर लिया गया। गौर करने वाली बात है कि भारत के ग्रामीण विद्युतीकरण अभियान से प्रभावित होकर जॉर्डन और सीरिया जैसे पश्चिमी एशियाई देशों और अफ्रीका के कुछ देशों ने अपने गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए भारत से मदद मांगी है। इन देशों ने अपने गांवों में बिजली पहुंचाने के लिए ग्रामीण विद्युतीकरण निगम (आरईसी) में रुचि दिखाई है।
इस उपलब्धि का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्वीट में कहा था- ‘28 अप्रैल 2018 को भारत की विकास यात्रा में एक ऐतिहासिक दिन के रूप में याद किया जाएगा। कल हमने एक वादा पूरा किया, जिससे भारतीयों के जीवन में हमेशा के लिए बदलाव आएगा। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब भारत के हर गांव में बिजली सुलभ होगी।’

इस वर्ष हर घर होगा रोशन
हर गांव में बिजली पहुंचाने के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार हर घर को रोशन करने की मुहिम में जुटी है। प्रधानमंत्री ने 25 सितंबर, 2017 को प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना ‘सौभाग्य’ की शुरुआत की थी। इसके तहत मार्च 2019 तक सभी घरों को बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन मोदी सरकार लक्ष्य से काफी पहले दिसंबर, 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुंचा देना चाहती है। 
इस योजना का फायदा उन लोगों को मिल रहा है जो पैसों की कमी के चलते अभी तक बिजली कनेक्शन नहीं ले पाए थे। इसके तहत ग्रामीण के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी देश में सभी घरों का विद्युतीकरण सुनिश्चित करना है। इस योजना पर करीब 16,320 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। सरकार ने 2018-19 के बजट में 2750 करोड़ रुपए ‘सौभाग्य’ के लिए दिए हैं। यह उन चार करोड़ परिवारों के घर में नई रोशनी लाने के लिए है जिनके घरों में आजादी के 70 साल के बाद भी अंधेरा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने 5 जनवरी 2015 को 100 शहरों में पारंपरिक स्ट्रीट और घरेलू लाइट के स्थान पर एलई​डी लाइट लगाने के कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इसके अंतर्गत अब तक 29.83 करोड़ एलईडी बल्ब लगाए जा चुके हैं। बिजली की खूब बचत भी हो रही है और पैसे भी बच रहे हैं। सालाना 38,743 मिलियन किलोवाट बिजली बचाई जा रही है और इससे 15,497 करोड़ रुपए की वार्षिक बचत भी हो रही है। पर्यावरण के लिए भी यह कारगर साबित हो रहा है। 3,13,82,026 टन कार्बन डायऑक्साइड का उत्सर्जन कम हो गया है।  यह परियोजना 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाई जा रही है। सबसे बड़ी बात है कि इसके चलते खर्च और बिजली की तो बचत हो ही रही है प्रकाश भी पहले से काफी बढ़ गया है। यही नहीं भारी मात्रा में लेड बल्बों की खरीद होने के चलते उसकी कीमत भी 135 रुपए के बजाय 80 रुपए प्रति बल्ब बैठ रही है।

पहली बार बिजली निर्यातक बना देश
चार साल पहले देश अभूतपूर्व बिजली संकट झेल रहा था, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि अब देश में खपत से अधिक बिजली उत्पादन होने लगा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार भारत ने पहली बार वर्ष 2016-17 (फरवरी 2017 तक) के दौरान नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार को 579.8 करोड़ यूनिट बिजली निर्यात की, जो भूटान से आयात की जाने वाली करीब 558.5 करोड़ यूनिटों की तुलना में 21.3 करोड़ यूनिट अधिक है। 2016 में 400 केवी लाइन क्षमता (132 केवी क्षमता के साथ संचालित) मुजफ्फरपुर – धालखेबर (नेपाल) के चालू हो जाने के बाद नेपाल को बिजली निर्यात में करीब 145 मेगावाट की बढ़ोतरी हुई है।

बिजली उत्पादन बढ़ा, बर्बादी रुकी
मोदी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का असर है कि देश में लगातार बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। इसकी दो बड़ी वजहें हैं। एक तरफ वितरण में होने वाला नुकसान कम हुआ है। दूसरी ओर सफल कोयला एवं उदय नीति से उत्पादन बढ़ा है। जैसे- 2013-14 में बिजली उत्पादन 96,700 करोड़ यूनिट हुआ था, जो 2014-15 में बढ़कर 1,04,800 करोड़ यूनिट हो गया। ये दौर आगे भी जारी रहा और 2016-17 में बिजली उत्पादन 1,16,000 करोड़ यूनिट हो गया। 2017 तक बिजली हानि या चोरी घटकर 25 प्रतिशत रह गई है। 2017 पहला ऐसा वर्ष रहा जब बिजली की अधिकता रही । 2016-17 में पहली बार नवीकरणीय ऊर्जा की शुद्ध बढ़त परंपरागत ऊर्जा की शुद्ध बढ़त से अधिक रही। सौर और पवन ऊर्जा अब तक के सबसे कम मूल्य पर उपलब्ध है।



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