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सोमवार, 20 मई 2019

मोदी का जन्मदिन देश के लिए स्वच्छता और सेवा दिवस है

स्वच्छता और शौचालय क्रांति का देश में अलख जगाने वाले सुलभ इंटरनेशनल ने भी नई दिल्ली के मावालंकर हाॅल में प्रधानमंत्री मोदी का 68 वां जन्मदिन ‘स्वच्छता दिवस’ और ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाया

‘स्वच्छ भारत अभियान के तहत नौ करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है, देश के 90 फीसदी इलाकों तक शौचालयों की सुविधा पहुंच चुकी है, 20 राज्य और साढ़े चार लाख गांवों को ‘खुले में शौच से मुक्त’ (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा है’ आज देश के आम लोगों की भागीदारी और जुनून के साथ एक बहुत प्रभावी मिशन बन चुका है।’ यह बातें सिर्फ आंकड़े भर नहीं हैं, बल्कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पिछले 4 सालों की कड़ी मेहनत का नतीजा है, शायद इसीलिए उनके जन्मदिन 17 सितंबर को पूरे देश में स्वच्छता दिवस के रूप में मनाया गया। स्वच्छता और शौचालय क्रांति की देश में शुरुआत करने सुलभ इंटरनेशनल ने भी नई दिल्ली के मावालंकर हाॅल में प्रधानमंत्री मोदी का 68 वां जन्मदिन ‘स्वच्छता दिवस’ और ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाया। इस उपलक्ष्य में सुलभ ने 568 किलो का लड्डू बनवाया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर और इस समारोह के अध्यक्ष केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सुलभ संस्थापक डॉ. विन्देश्वर पाठक के साथ लड्डू काटा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री के जीवन और उनके अब तक के कार्यकाल पर आधारित एक प्रर्दशनी का भी आयोजन किया गया, जिसका अवलोकन केंद्रीय मंत्री सहित कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने बड़ी उत्सुकता के साथ किया। इस मौके पर ‘सृजनी संस्था’ की सावित्री देवी की बनाई गई अनूठी कलाकृतियों को भी सुलभ की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी को भेंट स्वरूप भेजा गया। इन कलाकृतियों में बाल कृष्णा और भगवान बुद्ध को उकेरा गया है। साथ ही सुलभ ने प्रधानमंत्री मोदी के लिए एक स्मृति चिन्ह भी मंत्री गण को भेंट किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और अन्य लोगों को डॉ. विन्देश्वर पाठक द्वारा लिखित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बायोग्राफी ‘मेकिंग ऑफ लीजेंड’ भी भेंट के रूप में दी गई।

मोदी ने स्वच्छता को आंदोलन बनाया
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए प्रसिद्ध कवि और पत्रकार सुरेश नीरव ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके स्वच्छता और स्वस्थ भारत के निर्माण में अहम योगदान को रेखांकित किया। गांधी के बाद स्वच्छता को आंदोलन बनाकर उसे गति देने का काम हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया है। डॉ. पाठक की 5 दशकों से अधिक सुलभ यात्रा पर उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक से इस दुनिया की अधिकतर समस्याओं को हल किया जा सकता है। पाठक जी ने ऐसी तकनीक निकाली कि मैला बचे ही न और जब मैला होगा ही नहीं तो उसे ढोने की जरुरत ही नहीं पड़ेगी। पूरे विश्व ने इनके आधुनिक और हमेशा के लिए प्रगतिशील रहने वाले कामों को देखते हुए डॉ. पाठक को उत्तरार्ध गांधी का विशेषण दिया है।

पुनर्वासित स्कैवंेजर्स ने भी दी बधाई
इस अवसर पर पुनर्वासित स्कैवेंजर्स ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पीएम के एक स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए दुआ की। इस शुभ अवसर पर उन्होंने अपनी सफलता की कहानियां भी सुनाईं, जिसमें सुलभ अंधेरे में एक रोशनी बनकर आया और सबकी जिंदगी बदल गया। सुलभ की बदौलत ये लोग मैला ढोना छोड़कर, आत्मसम्मान के साथ आत्मनिर्भर होकर जी रहे हैं। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश से आई इन महिला स्कैवेंजर्स की जिंदगी सुलभ संस्था की वजह से बदली और सुलभ के ट्रेनिंग सेंटर में काम करके ये महिलाएं बेहतर तरीके से जीवन यापन कर रही हैं। वहीं वृंदावन की विधवा माताएं और सुलभ से जुड़े कई अन्य लोगों ने भी आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की मुबारकबाद दी और उनके यशस्वी होने की कामना की।

उषा शर्मा, अलवर
राजस्थान के अलवर जिले की रहने वाली उषा शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए उषा चौमर से उषा शर्मा बनने की मार्मिक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि 15 साल पहले वह मैला ढोया करती थीं, लेकिन 2003 में सुलभ अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सेवा संगठन ने उन्हें मैला ढोने की अमानवीय प्रथा से मुक्ति दिलाई। आज वो इसी संगठन में अध्यक्ष हैं और देश-विदेश के कई बड़े मंचों से लोगों को संबोधित कर चुकी हैं। अब वे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छूआछूत और महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दों को उठा रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने एक ही जीवन में दो जीवन जिए हैं। पहले कोई उनकी परछाई के नजदीक भी नहीं आता था, लेकिन अब सभी उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं।

 

पूजा शर्मा, टोंक
राजस्थान के टोंक से आईं पूजा शर्मा ने भी प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई देते हुए बेहद कम उम्र में ही अपने साथ घटी घृणित व्यथा के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि वह मां के साथ मैला ढोने जाती थीं। मैला ढोने की वजह से कोई भी उनके साथ बैठना नहीं चाहता था और स्कूल की क्लास में उन्हें सबसे पीछे बैठना पड़ता था। उन्होंने कहा कि एक बार उनके एक शिक्षक ने कन्याभोज दिया, लेकिन साथ के बच्चों ने उसका बहिष्कार कर दिया और उसे कन्याभोज में शामिल नहीं किया गया। लेकिन साल 2008 में सुलभ की टीम टोंक पहुंची और उसने भी सुलभ संस्था के सेंटर को ज्वाइन किया, फिर उसका जीवन पूरी तरह से बदल गया। अब वह बेहतर जिंदगी जी रही है और समाज में सभी लोग उसे इज्जत देते हैं। सुलभ के ‘कास्ट बाई चॉइस’ आंदोलन से उन्होंने अपनी जाति भी बदल ली और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो गईं।

अब्दुल लतीफ खान, जम्मू
जम्मू से गंगा-जमुनी तहजीब की खुशबू लेकर आये अब्दुल खान ने अपने बेहद ऊर्जावान संबोधन में डॉ. पाठक को गांधी का दूसरा रूप बताते हुए कहा कि पाठक जी की वजह से दुनिया भारत का खूबसूरत चेहरा देख रही है। उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का मुकम्मल जहां पाठक जी जैसे लोगों से पूरा हो रहा है। उन्होंने मोदी और डॉ. पाठक को स्वच्छता की क्रांति का असली सिपाही बताते हुए कहा इन दोनों ने देश को सुनहरा बनाने का बीड़ा उठाया है, जहां कोई भेदभाव नहीं होगा और सबके लिए समान अवसर होंगे।

सांस्कृतिक कार्यक्रम और कवि सम्मलेन
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सितार, गिटार और तबले सहित कई वाद्य यंत्रों पर संगीतकारों की मनमोहक प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया। वहीं सुलभ पब्लिक स्कूल के बच्चों ने भी अपने गायन, नाटक और नृत्य की प्रस्तुति से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। कार्यक्रम के अंत में कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया। कवि सम्मेलन में काव्य की सरिता बही। कवि शंभु सिंह मनहर ने जब राष्ट्रवाद की अलख जगाती अपनी कविता पढ़ी तो पूरा सभागार तालियों की गूंज से भर गया।
‘मनुजित छोड़िए ये देव धड़कन से भी पावन है, करें क्या वंदना इसकी ये वंदन से भी पावन है, लगा लें हम इसे माथे निगाहों में इसे भर लें, हमारे देश की मिट्टी ये चंदन से भी पावन है।’ 
‘इसे ही देखने सूरज उगा नित इसे देख डूबा है, हजारों हैं अजूबे ये अजूबों का अजूबा है, समंदर सात लांघो तुम सितारों में भले खोजो, हमारे देश से बढ़कर न कोई देश दूजा है।’
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित कवि वागेश दिनकर ने पीएम मोदी के लिए कविता सुनाई।
‘आज फिर भाग्य जागा भारत भूमि का, आज उल्लास ने मातृ मंदिर छुआ, राष्ट्र के शासना धीश के पीठ पर राष्ट्र का एक सेवक प्रतिष्ठित हुआ।’
मशहूर कवि सुरेश नीरव ने जीवन की सीख देती हुई कविता पर खूब तालियां बटोरी-
‘दोस्तों को भी पालते रहिए, हां मगर विष निकालते रहिए, दुश्मनों पे तो कुछ भरोसा है, दोस्तों को संभालते रहिए, ये नेकियां ही तो काम आएंगी, इन्हें दरिया में डालते रहिए।’ 

 



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