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शुक्रवार, 21 जून 2019

वैश्वीकरण के खिलाफ 'अपने आप'

मानव तस्करी और महिला उत्पीडऩ के खिलाफ आवाज बुलंद करना और पीडि़ताओं को नया जीवन देना अपने आप नहीं होता। लेकिन 'अपने आप' ने पीडि़ताओं के पक्ष में न सिर्फ तर्क गढ़े, बल्कि उनमें उम्मीद की रोशनी भी दिखाई

'एक दुनिया जहां इंसानों की खरीद-फरोख्त न होती होइस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 'अपने आपलगातार काम कर रही है। पिछले दो दशकों से मानव तस्करी और वेश्यावृत्ति के खिलाफ काम करने वाली रुचिरा गुप्ता की यह संस्था कई मायनों में अहम है। संस्था के तमाम विचार ही बहुत कुछ सोचने-विचारने को मजबूर करते हैं। देह के व्यापार को मात्र एक समस्या समझकर समाधान के प्रयास करना बेमानी है। जब तक इसके तमाम सामाजिक कारणों पर चर्चा नहींं होगीतब तक किसी सही समाधान पर नहींं पहुंचा जा सकता। आंकड़े गवाह हैं और सच भी है कि बाजार में धकेली गईं अधिकतर औरतें समाज के उस हिस्से से आती हैं जिसमें अधिकतर अनुसूचित जातिजनजाति और गरीब पृष्ठभूमि की होतीं हैं। इसे केवल समस्या मान कर समाधान की ओर अग्रसर हो जाना किसी भी तरह से समाधान तक नहींं पहुंचाएगा। 'अपने आपजहां मानव तस्करी से पीडि़तों को छुड़ा कर उन्हें बेहतर जीवन देने का हरसंभव प्रयास करती हैवहीं बार-बार उन सामाजिक कारणों की भी याद दिलाती है जिन वजहों से यह सब होता है। इस समस्या का समाधान सिर्फ पीडि़ता को ही ध्यान में रखकर खोजा जाता हैलेकिन अपने 'आप संस्थाका ऐसा मानना नहीं है। 'अपने आपका कैंपेन है, 'कूल मेन डोंट बॉय सेक्सयानी गैरतमंद पुरुष देह की खरीद नहींं करतेक्योंकि इस बाजार में औरत की नुमाइश होती हैलेकिन उसके खरीददार पुरुषों से शायद ही जवाब तलब होता हो। यह भी एक पहलू है जिसको ध्यान में रखा जाना बेहद जरूरी है।

अपने आप की शुरुआत

'अपने आपसंस्था का गैर सरकारी संगठन के रूप में पंजीकरण 2002 में मुंबई से हुआ था। लेकिन इस विचार की शुरुआत हुई रुचिरा गुप्ता की एम्मी अवार्ड विनिंग डॉक्यूमेंट्री 'द सेलिंग ऑफ इनोसेंट्ससे जिसमें नेपाल से औरतों की होने वाली मानव तस्करी का पर्दाफाश किया गया था। कुल 22 औरतें जो इस फिल्म का सब्जेक्ट थींउन्होंने मिलकर एक विचार का आगाज़ किया 'एक दुनिया जहां औरतों की खरीद-फरोख्त न होऔर धीरे-धीरे काम का दायरा बढ़ा बिहारपश्चिमी बंगाल और दिल्ली जैसी जगहों पर स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया। तमाम जगहों पर ऐसे सेंटर्स को स्थापित किया गया जहां ऐसी तमाम औरतें एकत्रित होकरशिक्षा के अवसर पा सकेंजीविका के नए अवसरों को जान सकें तथा अन्य समस्याओं पर चर्चा कर

सकें। वेश्यावृत्ति से सालों से पीडि़त महिलाएं तमाम गरीबीएड्स भुखमरी जैसी वजहों से जो अब इस दुनिया में नहींं हैंलेकिन 'अपने आपअपना काम निरंतर करता जा रहा है। 'अपने आपअब तक 21,000 औरतों को सम्मानजनक जीवन देने में कामयाबी हासिल कर चुका है।

क्या करता है 'अपने आप'

जैसा कि जाहिर है 'अपने आपसंस्था मानव तस्करी और देह व्यापार में लिप्त पीडि़ताओं के पुनर्वास का काम करती है। साल 2002 से 'अपने आपने तकरीबन 150 स्वयं सहायता समूहों को बनाया हैवह भी गांवोंझुग्गियोंरेड लाइट एरिया और ऐसी तमाम जगहों पर जहां जिस्म फरोशी के धंधे होते हैं। रोचक बात यह भी है कि 'अपने आपकी मदद से इन्हीं में से कई महिलाएं ऐसी शख्सियतों के रूप में उभरीं जो पहले खुुद पीडि़त थींलेकिन अब अपने-अपने इलाके में इसके खिलाफ उठने वाली आवाज का नेतृत्व कर रही है। 'अपने आपका मानना है कि इस काम में लिप्त औरतों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाए क्योंकि वेश्यावृत्ति मानव तस्करीबंधुआ मजदूरी आदि को ध्यान में रखते हुए पीडि़ता को अपराधी मानना किसी भी तरह से नहींं है। कुल मिलाकर 'अपने आपका दायरा सिर्फ पीडि़त औरतों की मदद तक ही सीमित नहींं हैबल्कि वह अन्य सामाजिक कारणों को भी ध्यान में रखकर अपना काम करती है और यही बात इसके कार्य को और भी व्यापक बनाती है। 'अपने आपका मानना है कि मूल रूप से जो लोग इन अपराधों मेंजैसे मानव तस्करी आदि में लिप्त हैंउन्हें अपराधी माना जाए और उनके खिलाफ कठोर कानून का प्रावधान हो।

वेश्यावृत्ति कोई विकल्प नहींं

'प्रॉस्टीट्यूशन इज नॉट अ च्वाइस बट द एबसेंस ऑफ च्वाइस' (वेश्यावृत्ति कोई विकल्प नहींं बल्कि विकल्पों का अभाव है)। वाकई कोई भी महिला इस काम को एक विकल्प के तौर पर नहींं अपनातीबल्कि समाज का ढंाचा उन्हें यहां मजबूर करके धकेलता है। 'अपने आपके तमाम मूल विचारों में से एक विचार यह भी है जो इसके काम को अलग बनाता है।

'कूल मेन डोंट बाय सेक्सकैंपेन

'अपने आपसंस्था के अन्य कामों को ध्यान में रखते हुए इसके इस कैंपेन को मुख्य रूप से समझा जाना चाहिएक्योंकि अक्सर हवाला दिया जाता है कि देह व्यापार को वैधानिक दर्जा दिया जाए या फिर सिर्फ इस काम को ही एकल समस्या समझ लिया जाता है। लेकिन पूरे प्रकरण में वे लोग जो इसमें फायदे का सौदा करते हैंपूरी तरह अछूते रहते हैं। यह कैंपेन उन लोगों के लिए आईना हैजो वाकई देह खरीद रहे हैं उन्हें पूरी तरह इससे बाहर रखा जाता है और यह कैंपेन उसी तरफ हमारा ध्यान आकर्षित करती है। 'कूल मेन डोंट बाय सेक्सयानी गैरतमंद पुरुष जिस्म की खरीद नहींं करते। आज जब देह व्यापार पर चिंता व्यक्त की जाती है तो उनसे लाभांवित होने वाले पुरुषों की भी चर्चा होनी चाहिए। लेकिन उन पुरुषों पर कोई चर्चा नहींं करता जो उनके खरीददार होते हैंसमाज के पास उनके लिए कोई बुरे शब्द नहींं होते। ऐसे में यह कैंपेन काबिले तारीफ है।

'मांस का दरियाबीते समय रुचिरा गुप्ता ने 'रिवर ऑफ फ्लेश एंड अदर स्टोरीज' (मांस का दरिया और अन्य कहानियांनामक किताब का संपादन किया जो कि मूल रूप से भारत के जाने-माने लेखकों की वेश्यावृत्ति व मानव तस्करी जैसे विषयों पर आधारित कहानियों का संकलन है। कमलेश्वरअमृता प्रीतमइंदिरा गोस्वामीइस्मत चुगताईबिभूतिभूषण बंद्योपाध्यायजे पी दासकमला दासकृष्ण चंदरसआदत हसन मंटो आदि लेखक हैं।

और हां... जैसा कि संस्था की शुरुआत में लक्ष्य साधा गया था, 'एक दुनिया जहां मानवों की कोई खरीद-फरोख्त न हो' 'अपने आपसंस्था आगे के लिए भी यही लक्ष्य रखती है। 'अपने आपका लक्ष्य है कि औरतों के लिए सम्मानजनक जीवन के विकल्पों में इजाफा हो और ऐसी स्थितियों की निरंतर कमी होजिसमें उनकी दयनीय स्थिति मानव तस्करी जैसे धंधे का फायदे का सौदा बनती है। 



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