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सोमवार, 20 मई 2019

समाज में स्वच्छ भारत मिशन की क्रांतिकारी भूमिका

गांधीजी की 150 वीं जयंती समारोह की शुरुआत के लिए नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए 124 देशों के कलाकारों द्वारा तैयार 'वैष्णव जन' का अंतरराष्ट्रीय संस्करण लॉन्च किया

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का गहरा विश्वास था कि स्वच्छता, ईश्वरीयता के आगे है और भारत के लोगों की बेहतरी के लिए राष्ट्रीय प्रगति का मार्ग भी है। वे कहते थे कि हम अशुद्ध शरीर के साथ भगवान का आशीर्वाद प्राप्त नहीं कर सकते हैं और न ही अशुद्ध मन से भगवान को पाया जा सकता है। बापू को  श्रद्धांजलि देने के लिए उनके कदमों पर चलना होगा और स्वच्छता के मंत्र का पालन करना होगा। महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती समारोह की शुरूआत करने के लिए, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय द्वारा आयोजित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय स्वच्छता सम्मलेन (एमजीआईएससी) का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दिल्ली में किया गया। संयोग से यह स्वच्छ भारत मिशन की भी चौथी वर्षगांठ का अवसर था। एमजीआईएससी 4 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन था, जो लगभग 68 देशों के 53 स्वच्छता मंत्रियों और 200 से अधिक प्रतिनिधियों को एक साथ एक मंच पर लाया, जिसमें दुनिया भर के डब्लूएएसएच (वाश - जल, स्वच्छता और स्वच्छता) से संबंधित नेता शामिल हैं।
पिछले चार वर्षों में, ग्रामीण स्वच्छता कवरेज ने अक्टूबर, 2014 में 39 प्रतिशत से बढ़कर आज 90 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी की है, जिसमें स्वच्छता को लेकस्र व्यवहार परिवर्तन कार्यान्वयन का प्रमुख केंद्र रहा है।
स्थाई विकास लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए 2030 तक दुनिया की समृद्धि के लिए गरीबी को समाप्त कर सभी के लिए सामान अवसर की बात कही गई है।

स्वच्छ भारत मिशन एक क्रांति है
4 दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि स्वच्छ भारत एक जन आंदोलन बन गया है और यह क्रांति सही समय पर हो रही है। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि 2030 तक दुनिया के कई भागों में पर्याप्त और समान स्वच्छता एवं लोगों को स्वस्थ बनाने का लक्ष्य हासिल करना खासा चुनौतीपूर्ण है। 
राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छता में सुधार और खुले में शौच की बुराई को खत्म करने के व्यापक प्रभाव हैं। वे बेहद अहम सामाजिक और आर्थिक निवेश हैं। उचित शौचालय और उपयुक्त स्वच्छता तथा स्वास्थ्य प्रक्रियाओं के अभाव से कुपोषण और जीवन पर्यंत नुकसान जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। इसीलिए भारत जैसे देश में मानव पूंजी और हमारी जनसंख्या की सुरक्षा तथा हमारे बच्चों को स्वर्णिम भविष्य देने के लिए स्वच्छ भारत जैसे अभियान खासे अहम हैं। बालिकाओं के लिए अलग शौचालय के अभाव में किसी भी लड़की को विद्यालय नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसी घटनाएं हमारे सामूहिक विवेक पर सवालिया निशान की तरह होंगी। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत समाज में क्रांतिकारी भूमिका निभा रहा है। लोगों को एकजुट करने, जनांदोलन और राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में यह पूर्ण प्रतिबद्धता के समान है। स्वच्छ भारत अभियान हमारे स्वतंत्रता आंदोलन की भावना का प्रतिनिधित्व करता है। भारत 2 अक्टूबर, 2019 को खुले में शौच से पूरी तरह से मुक्त होने की दिशा में बढ़ रहा है। हम गांधी जी को 150वें जन्मदिन पर दिया जाने वाला सबसे अच्छा उपहार हो सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान पुरुषों और महिलाओं के दुर्लभ उत्साह, दूरदर्शिता, सामाजिक सहानुभूति और नागरिक होने के गर्व जैसी सामान्य भारतीयों की असाधारण विशेषताओं के दम पर आगे बढ़ा है। व्यक्तिगत और सामूहिक तौर पर उन्होंने अपने पड़ोस, अपने गांवों और अपने कस्बों व शहरों को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए काम किया है। हर जगह, हर दिन, सभी लोगों और परिवारों ने अपने साथी नागरिकों को व्यवहार में बदलाव के लिए प्रेरित किया। हमारे स्वच्छता चैंपियन देश के सभी धर्मों, समाज के सभी तबकों, सभी समुदायों और सभी सामाजिक एवं आर्थिक समूहों से आते हैं। 68 भागीदार देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वच्छ भारत के साथ हमारी सफलताएं, स्वच्छता के क्षेत्र में हमारी उपलब्धियां, हमारी व्यवस्थाएं और तंत्र उन सभी के लिए उपलब्ध हैं जिनकी उन्हें जरूरत है। स्वच्छता में सुधार एक लक्ष्य या एक या अन्य देश का लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह मानवता की नियति है। राष्ट्रपति ने अपर्याप्त स्वच्छता की समस्या से पार पाने के लिए पांच महत्वपूर्ण विषय सुझाए, जिन्हें देश अपना सकते हैं। ये हैं- सुनिश्चित करें कि लोग स्वच्छता कार्यक्रमों की योजना बनाने, क्रियान्वयन और प्रबंधन की अगुआई करें; प्रभावी और कुशलता से सेवा देने के लिए बेहतर और किफायती प्रौद्योगिकियों के इस्तेमाल; स्वच्छता आंदोलन के वित्तपोषण और उसे टिकाऊ बनाने के लिए वित्तपोषण के नए साधन तैयार करना; सरकार में स्वच्छता कार्यक्रम तैयार करने, लागू करने और निगरानी की क्षमताएं विकसित करना।

वैश्विक समस्या से समाधान तक
संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि यूरी अफनासेव ने स्वच्छ भारत मिशन की प्रगति की सराहना की और कहा, "स्वच्छ भारत सामाजिक परिवर्तन के लिए पूरी दुनिया में कहीं भी सबसे बड़ी पहल में से एक है, यह हमेशा से एक योजना से बढ़कर था। यह व्यवहार परिवर्तन के लिए एक आंदोलन था और जैसा कि हम जानते हैं कि व्यवहार में बदलाव करना मुश्किल होता है। यह सरकार, नागरिक समाज, एनजीओ और सह-भागीदारों और नागरिकों के बीच एक अनुकरणीय साझेदारी का प्रदर्शन करता है। राजनीतिक नेतृत्व और कार्रवाई के इस रूपांतरण ने पिछले चार वर्षों में लगभग 400 मिलियन लोगों को शौचालय की सुविधा और स्वच्छता प्रदान की है। 
यह मिशन दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए एक सबक के साथ एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में कार्य कर रहा है। चार वर्षों में भारत वैश्विक समस्या का हिस्सा होने से वैश्विक समाधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनने में कामयाब रहा है। यह समय की कमी के कारण एक प्रेरणादायक उपलब्धि है।
पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के सचिव परमेश्वरन अय्यर ने इस मौके पर कहा, ‘सम्मेलन का नाम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने औपनिवेशिक भारत में कहा था कि स्वच्छता, राजनीतिक स्वतंत्रता से अधिक महत्वपूर्ण है। गांधीजी की खुले में शौच से मुक्त भारत की परिकल्पना अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वास्तविकता में बदल रही है।’
इस अवसर पर  केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा, ‘स्वच्छ भारत मिशन केवल आधारभूत प्रक्रिया नहीं है। यह कुछ और है, इसमें गतिशील बदलाव हैं क्योंकि इसमें व्यवहारिक परिवर्तन शामिल हैं। महात्मा गांधी के बाद हमारे प्रधानमंत्री मोदी के अलावा भारत में कोई नेता नहीं है जिसने स्वच्छता के मुद्दे पर इतनी बड़ी पहल की हो और इसे वैश्विक स्तर ले गया हो।’
पेयजल और स्वच्छता मंत्री उमा भारती ने उद्घाटन संबोधन के दौरान कहा, ‘सम्मलेन में हमारा उद्देश्य यही बताना है कि स्वच्छता मायने रखती है। यह गरीबी में कमी और 
टिकाऊ विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। यह आर्थिक विकास और पर्यावरणीय गिरावट का मुकाबला करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। हमें तत्काल विश्व की स्वच्छता आवश्यकता के लिए दीर्घकालिक समाधान की आवश्यकता है और इसे केवल एक साथ काम करके ही हासिल किया जा सकता है।’
इस अवसर पर चंपारण अभियान के दस्तावेज के रूप में ‘चंपारण का स्वच्छागृह’ नामक पुस्तक लांच की गई। उमा भारती ने इस पुस्तक की पहली प्रति भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत की।
सम्मेलन के पहले दिन अर्थात 29 सितंबर 2018 को एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसका विषय ‘प्रौद्योगिकी और स्वच्छता में नवाचार’ था। इस सत्र में, प्रतियोगिता के फाइनल प्रतिभागियों ने नवाचारकर्ताओं और स्वच्छता विशेषज्ञों की सम्मानित जूरी के सामने अपने इनोवेशन (नवाचार) प्रस्तुत किए।
सुलभ स्वच्छता और सामाजिक आंदोलन के संस्थापक डॉ. विन्देश्वर भी सम्मानित ज्यूरी में शामिल थे, उनके अलावा आरए माशेलकर, अध्यक्ष उच्च स्तरीय तकनीकी समिति, एमडीडब्ल्यूएस, भारत; रॉबर्ट चेम्बर्स, प्रोफेसर, आईडीएस, ससेक्स विश्वविद्यालय, यूनाइटेड किंगडम; सू कोटेस, उप कार्यकारी निदेशक, डब्ल्यूएसएससीसी और पीटर हार्वे, चीफ, जल, स्वच्छता और शिक्षा केंद्र, यूनिसेफ भी सम्मानित जूरी में शामिल थे। सम्मेलन के दूसरे दिन, स्वच्छता मंत्रियों सहित 116 विदेशी प्रतिनिधियों ने महात्मा गांधी के जीवन और कार्य से संबंधित चुनिंदा साइटों का ‘गांधी ट्रेल’ पर दौरा किया।



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