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सोमवार, 20 मई 2019

समरसता की छटा और लोकपर्व छठ

सुलभ प्रणेता डॉ. विन्देश्वर पाठक की प्रेरणा से लोकपर्व छठ से जुड़ी सादगी और श्रद्धा के संदेश के साथ सामाजिक बदलाव की नई प्रेरणा भी जुड़ गई है। डॉ. पाठक, अमोला पाठक और समस्त सुलभ परिवार अलवर-टोंक की पुनर्वासित महिला स्कैवेंजर्स व वृंदावन की विधवा माताओं के साथ वर्षों से छठ मना रहा है। वे महिलाएं जो कभी समाज में प्रताड़ना का दंश झेल रही थीं, आज भारत के एक बड़े लोकानुष्ठान को सबके साथ श्रद्धा के साथ मना रही हैं



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