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सोमवार, 20 मई 2019

गरीबी और अस्वच्छता से साझा संघर्ष

अफ्रीकी मुल्क माली की गिनती दुनिया के सबसे गरीब देशों में होती है। हालिया दशक में यहां स्वच्छ जलापूर्ति को लेकर काफी उल्लेखनीय कार्य हुए हैं, पर स्वच्छता के मामले यह अब भी एक पिछड़ा देश है

माली अफ्रीका में पूरी तरह थल से घिरा हुआ एक देश है। माली की एक पहचान यह भी है कि विश्व के सबसे अधिक गरीब परिवारों वाले इस देश में स्वच्छता का ग्राफ असंतोषजनक है। उन्नत शौचालयों और शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के मामले में माली की स्थिति अच्छी नहीं है। स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से अलग माली की एक सांस्कृतिक पहचान भी है। यहां की पारंपरिक लोककला और संगीत की काफी चर्चा होती है। यहां आज भी कई कमाल के संगीतकार भी रहते हैं।

इतिहास, संविधान और सत्ता
कभी ट्रांस-सहारा व्यापार पर नियंत्रण रखने वाले तीन साम्राज्यों घाना, माली (जिससे माली नाम लिया गया है) और सोनघाई साम्राज्य का एक हिस्सा था। 1800 के अंत में यह फ्रांसीसी नियंत्रण में आ गया और फ्रांसीसी सूडान का एक हिस्सा बन गया। 1960 में माली संघ स्वतंत्र राष्ट्र माली बन गया। एक दलीय शासन के लंबे दौर के बाद 1991 में हुए तख्तापलट के बाद गणतंत्र और बहु-दलीय राज्य के रूप में नए संविधान और सत्ता का गठन किया गया।

निर्धनतम देशों में शुमार
माली अफ्रीका का आठवां सबसे बड़ा देश है। इसका क्षेत्र 12,40,000 वर्ग किलोमीटर दूरी में फैला हुआ है। इसकी जनसंख्या करीब एक करोड़ अस्सी लाख है। इसकी राजधानी बमेको है। माली की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती और मछली पालन पर आश्रित है। यहां प्राकृतिक संसाधनों में सोना प्रचुर मात्रा में है। अफ्रीकी महाद्वीप में यह तीसरा सबसे अधिक स्वर्ण बनाने वाला देश है। इसके अलावा यहां यूरेनियम और नमक भी मिलता है। लेकिन फिर भी लगभग आधे से अधिक नागरिक 1.25 डॉलर प्रतिदिन से भी कम कमा पाते हैं। यही वजह है कि माली दुनिया के सबसे निर्धनतम देशों में शुमार किया जाता है।

अफ्रीकी फ्रैंक
माली की मुद्रा पश्चिमी अफ्रीकी फ्रैंक है। इस मुद्रा का उपयोग अन्य सात पश्चिमी अफ्रीकी देश भी करते हैं। इसे आप मध्य अफ्रीकी फ्रैंक के साथ बदल भी सकते हैं। मध्य अफ्रीकी फ्रैंक का उपयोग 6 देशों द्वारा होता है और इन दोनों मुद्रा का एक निश्चित दर भी तय किया गया है।

प्रकृति और भूगोल
आठ क्षेत्रों में बंटे माली की उत्तरी सीमा सहारा के मध्य तक जाती है, वहीं देश की दक्षिणी क्षेत्र, जहां अधिकांश आबादी निवास करती है और यहां की विशेषता नाइजर और सेनेगल नदी है। माली उष्णकटिबंधीय जलवायु क्षेत्र के तहत आता है। देश के अधिकांश भाग में बहुत कम वर्षा होती है। सूखा पड़ना एक आम बात है। मई के अंत से या जून के शुरूआत में वर्षा शुरू हो जाती है, जो अक्टूबर के अंत या नवंबर से शुरुआत तक रहता है। इस समय के दौरान निगेर नदी में बाढ़ आना भी एक सामान्य सी बात है। वर्षा ऋतु के जाने के बाद नवंबर के शुरू से ही ठंड भी शुरू हो जाता है और फरवरी के शुरुआत तक रहता है। फरवरी के मध्य से लेकर वर्षा की शुरुआत तक का मौसम गर्मी वाला होता है। दिन का तापमान मार्च और अप्रैल में उच्चतम संख्या को पार कर लेता है। यह वर्ष का सबसे गर्म समय होता है। 

जल संकट
दिलचस्प है कि पानी की इस तरह की किल्लत को देखते हुए जलापूर्ति को लेकर माली में जिस तरह की भयावह स्थिति की कल्पना की जा सकती है, यह देश उससे उबरने के लिए कई स्तरों पर प्रयास कर रहा है, जिसके कुछ अपेक्षित परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। खासतौर पर शहरी इलाकों में शुद्ध जलापूर्ति के मामले में हाल के दशक में काफी सुधार आया है। पर इसका मतलब यह कतई नहीं कि माली जल-संकट से मुक्त हो चुका है। इसमें जो बात सबसे गौरतलब है कि वहां जो पानी उपलब्ध भी है, उसमें भारी मात्रा में क्लोरीन होता है। इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए यहां कई स्थानीय कंपनियों के सस्ते बोतल मिलते हैं, हालांकि उसे केवल विदेशी या अमीर लोग ही पीते हैं। पानी की गुणवत्ता को लेकर माली की स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां घूमने आने वाले पर्यटकों को पानी के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए अलग से एडवायजरी जारी की जाती है। 

वीजा प्रबंध और छूट
माली की यात्रा करने के लिए कुछ देशों के नागरिकों के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं है। इन देशों में अल्जेरिया, एंडोरा, बेनिन, बुर्किना, फासो, केमरून, केप, चाड, कोटे, गांबिया, घाना, गुइना, लिबेरिया, मोनाको, मोरोक्को, निगेर, निगेरिया, सेनेगल, सिएरा लोन, टोगो और ट्यूनीशिया हैं। अन्य सभी देशों के नागरिकों के लिए माली में आने से पहले वीजा लेना अनिवार्य है।



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