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मंगलवार, 20 फ़रवरी 2018

न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर

कड़े फैसलों के लिए मशहूर जस्टिस तीरथ सिंह ठाकुर अपने सौम्य स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। 3 दिसंबर 2015 को सुप्रीम कोर्ट के 43वें मुख्य न्यायाधीश बनने वाले जस्टिस ठाकुर का जन्म 4 जनवरी 1952 को जम्मू-कश्मीर के रामबन में हुआ था। इनके पिता देवीदास ठाकुर जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं। विरासत में कानूनी ज्ञान हासिल करने वाले टीएस ठाकुर एलएलबी करने के बाद बतौर वकील अक्टूबर, 1972 में अपने करियर की शुरुआत जम्मू कश्मीर से की। वह दीवानी, फौजदारी, टैक्स, संवैधानिक मामलों तथा नौकरी से संबंधित मामलों की वकालत जम्मू एवं कश्मीर हाईकोर्ट में करते रहे। 18 साल तक प्रैक्टिस करने के बाद 1990 में सीनियर एडवोकेट बने उसके चार साल बाद 16 फरवरी 1994 को उन्हें जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में एडिशनल जज बनाया गया। एक महीने के भीतर ही मार्च 1994 में उनका तबादला कर्नाटक हाईकोर्ट में किया गया। सितंबर 1995 में उन्हें स्थायी जज बनाया गया और जुलाई 2004 में उनका तबादला दिल्ली हाईकोर्ट में किया गया। 9 अप्रैल 2008 को उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट का कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाया गया। 11 अगस्त 2008 को पंजाब और हरियाणा के मुख्य न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया। 17 नवंबर 2009 को उन्हें देश के सर्वोच्च न्यायालय में बतौर न्यायाधीश की शपथ दिलाई गई और एचएल दत्तु के सेवानिवृत्त होने के बाद सर्वोच्च न्यायाल के 43वें मुख्य न्यायाधीश का दायित्व सौंपा गया। बतौर मुख्य न्यायाधीश एक वर्ष के कार्यकाल में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले देकर एक मिसाल कायम की।



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