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बुधवार, 21 नवंबर 2018

विरल आचार्य - आरबीआई के नए डिप्टी गवर्नर

रघुराम राजन की तरह विरल आचार्य भी आरबीआई की आज़ादी के पक्षधर हैं। रघुराम राजन के प्रशंसक विरल गरीबों का रघुराम राजन बनना चाहते हैं

विरल आचार्य को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का डिप्टी गवर्नर बनाया गया है। शानदार अकादमिक बैकग्राउंड रखने वाले आचार्य फाइनेंस सेक्टर के एक्सपर्ट माने जाते हैं। 42 वर्षीय आचार्य न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के फाइनेंस डिपार्टमेंट में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर के रूप में काम कर रहे थे। फाइनेंशियल सेक्टर में रिस्क पर बेहतर विश्लेषण और रिसर्च के लिए जाने जाते हैं। शुरुआती दिनों से ही पढ़ाई में अच्छे रहे आचार्य ने 1995 में आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। इसके बाद  2001 में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस से पीएचडी की। वर्ष 2001 से 2008 तक आचार्य लंदन बिजनेस स्कूल में रहे। विरल आचार्य न्यूरोपियन सिस्टेमैटिक रिस्क बोर्ड की वैज्ञानिक परामर्श समिति में बतौर सदस्य भी काम कर चुके हैं। इसके साथ ही वह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में भी सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं। फाइनेंस के फील्ड में दिलचस्पी और विशेषज्ञता हासिल रखने वाले आचार्य आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से काफी प्रभावित हैं। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा भी था कि वह गरीबों का राजन बनना चाहते हैं। विरल का कहना है कि अगर मैं राजन का पांच या दस फीसदी भी हो सका तो गरीबों का 'रघुराम राजन’ बन सकता हूं। राजन की तरह विरल आचार्य भी आरबीआई की आज़ादी के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि कि देश का सबसे बड़ा बैंक आरबीआई लोकतांत्रिक तौर पर जिम्मेदार हो, इसके लिए इसे पॉलिटिक्स से दूर रखा जाना चाहिए।



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