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मंगलवार, 14 अगस्त 2018

उषा किरण -बस्तर की नई 'उषा’

नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर में सीआरपीएफ की पहली महिला कमांडेंट

उषा किरण सीआरपीएफ में असिसटेंट कमांडेंट हैं। वे ट्रिपल जंप की राष्ट्रीय विजेता भी रही हैं। नक्सल प्रभावति क्षेत्र बस्तर में पहली महलिा अधिकारी के तौर पर उनकी तैनाती इन दिनों चर्चा में है। उषा बताती हैं कि उन्हें भविष्य में सेवाएं देने के लिए तीन के लिए ऑप्शन्स दिए गए थे, जिसमें से उन्होंने नक्सल प्रभावित बस्तर में आना स्वीकार किया। इसके पीछे की मुख्य वजह ये थी कि ये इलाका नक्सली हिंसा हमलों के कारण विकास नहीं कर पाया है। साथ ही स्थानीय लोगों की अज्ञानता व पुलिस और ग्रामीणों के बीच अपनत्व का अभाव भी है। उनकी नियुक्ति से आदिवासियों और महिलाओं में आशा की किरण जगी है। बस्तर में अपना पद संभालने के बाद किए अपने पहले अभियान से मिले एक्सपीरियंस के बारे में बताते हुए उषा ने बताया, 'आंतरिक दुरूह अंचल में बसे ग्राम भडरीमऊ (दरभा क्षेत्र) मैं अपने दल के साथ गई थी, जहां पहुंचने के लिए मुझे 20 किलोमीटर का रास्ता पैदल ही तय करना पड़ा। उस गांव में जब मैं पहुंचीं, तब मेरा मन यह देखकर खुश हुआ कि गांव की आदिवासी महिलाएं मुझको देखकर अपने-अपने घरों से बाहर निकल आईं और उन महिलाओं के चेहरे पर प्रसन्नता की झलक साफ दिखाई पड़ रही थी।, उषा का कहना है कि आदिवासी और यहां की महिलाएं पुरुष जवानों से डरे हुए रहते हैं, लेकिन उनके साथ ये लोग ज्यादा सहज महसूस करते हैं। उन्हें पुलिस यूनिफार्म में देखकर ग्रामीण महिलाएं उत्साहित होकर कह रही थीं, वे भी अपने बच्चों को पढ़ाएंगी और सुरक्षाबलों में नौकरी के लिए प्रेरित करेंगी। दरभा के थानेदार विवेक उईके का मानना है कि महिला अधिकारी के आने और उनके अभियान संबंधी सोच से सुरक्षा बलों के जवानों का मनोबल बढ़ा है। उषा ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें महज एक महिला न समझें और वे उन सबके साथ हर कठिन परिस्थिति में कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगी। एक आदिवासी महिला का कहना था कि अब हम महिलाएं खुद अपनी अस्मिता की सुरक्षा के प्रति निश्ंिचत हैं, क्योंकि हमारे हितों और भावनाओं की रक्षा के लिए एक महिला अधिकारी यहां मौजूद है।



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