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बुधवार, 12 दिसंबर 2018

अक्षय कुमार - खिलाड़ी कुमार अब होंगे संजीदा

खिलाड़ी कुमार इन दिनों 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ को लेकर ज्यादा ही उत्साहित हैं। इस फिल्म की कहानी स्वच्छता अभियान पर केंद्रित है। उनका मानना है कि यदि अब भी वो फिल्मों को लेकर संजीदा नहीं हुए, तो दर्शक उन्हें शायद ही कबूल करेंगे। इन्हीं मसलों पर अक्षय के साथ असीम चक्रवर्ती की बातचीत

'टॉयलेट-एक प्रेम’ क्या है यह फिल्म?

आप इसके टाइटल में मत जाइए। असल में यह एक टोटल कॉमेडी फिल्म है। बस, इसकी कहानी स्वच्छता के साथ जुड़ी हुई है। फिल्म का हीरो एक टॉयलेट का मालिक है और हीरोइन एक झुग्गी-झोपड़ी की लड़की है। दोनों प्यार में पड़ते है और शादी कर लेते है। फिर दोनों एक मकसद के तहत टॉयलेट बनाने में जुट जाते है। उनके इस अभियान में उन्हें जो दिक्कतें आती है, उसमें कॉमेडी का स्टायर भरपूर है।

क्या आप इसे प्रचार फिल्म मानते हैं ?

मैं इसे सिर्फ  एक मनोरंजक पारिवारिक फिल्म मानता हूं। चूंकि इन दिनों देश में स्वच्छ भारत अभियान चल रहा है और फिल्म का बेस्ड स्वच्छता है, इसीलिए यह सोच स्वाभाविक है। पर यकीन मानिए यह कोई प्रचार फिल्म नहीं है। मेरी पिछली फिल्मों की तरह यह भी एक मसाला फिल्म है। इसकी हर घटना क्रम को बहुत हल्के-फुल्के ढंग से पेश किया गया है।

एक तरफ 'इंटरटेनमेंट’, 'गब्बर इज बैक’, 'सिंह इज ब्लिंग’, दूसरी तरफ 'बेबी’, 'एयरलिफ्ट’,'रुस्तम’,' टॉयलेट-एक प्रेम कथा’...आप इधर मिक्स एंड मैच करके फिल्में कर रहे हैं ?

हां,अब मैं इसे मेंटेन करने की कोशिश कर रहा हूं। मैं अब दर्शकों के सामने टाइप्ड नहीं होना चाहता। अब जैसे कि 'रुस्तम’ के बाद मेरी अगली रिलीज होगी 'जॉली एलएलबी-2’, 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ तो बिल्कुल ही अलग है। आप इसे लीक से हटकर कॉमेडी फिल्म कह सकते हैं। वैसे भी इतने साल तक इंडस्ट्री में रहने के बाद यदि मैंै अब भी थोड़ा-सा मिक्स एंड मैच करके काम नहीं करता हूं,तो धीरे-धीरे दर्शक मुझे कबूल करना छोड़ देंगे।

सिर्फ  मिक्स एंड मैच वाली बात नहीं है, इधर आप रिस्क उठाने से भी नहीं डर रहे हैं। यानी वक्त के साथ आप अपने आपको बदल रहे है ?

लेकिन, यहां एक बात साफ  कर दूं कि इसका मतलब यह हरगिज नहीं कि 'मोहरा’ या 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’ जैसी फिल्में खराब थीं। असल में उम्र के साथ आपकी प्राथमिकता, मानसिकता, कैरियर प्लानिंग। सब कुछ बदलेगा ही। फिर हिंदी फिल्मों का जायका भी बदल रहा है। फिर जैसा कि मैंने आपसे पहले कहा है, इस उम्र में एक्सपेरिमेंट नहीं करूंगा,तो कब करूंगा। वैसे एक बात बता देना चाहता हूं, 'मोहरा’ मेरी और मेरी बीवी टिंक्कल की पसंदीदा फिल्म है।

लेकिन आपके समकालीन कई स्टार अब भी एक टाइप की फिल्में करते चल जा रहे है ?

मुझे नहीं लगता है कि इस बारे में मेरा कुछ कहना होगा, क्योंकि यह उनका निहायत निजी निर्णय है। मैं क्यों उनके कैरियर के बारे में कुछ कहने जाऊंगा?

अच्छा क्या आपको कभी इस बात का एहसास हुआ है कि दर्शक अक्षय कुमार को किस तरह की फिल्मों में देखना चाहते हैं?

इट डिपेंड्स ऑन माई मूड...क्योंकि मैं खुद भी एक दर्शक के तौर पर हर तरह की फिल्में देखना चाहता हूं, लेकिन देश की आलोचना करनेवाली फिल्में मुझे सख्त नापसंद हैं। इसका कुछ लोगों को बुरा लग सकता है। देश के कुछ लोग बुरे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि पूरा देश खराब है, इसीलिए आपने देखा होगा कि 'एयरलिफ्ट’,'बेबी’ जैसी फिल्मों में कुछेक खराब लोगों को ही टार्गेट किया गया है। इन सभी फिल्मों में कभी किसी देश पर कोई आरोप नहीं लगाया गया है। मेरी नई फिल्म 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा’ भी किसी आरोप-प्रत्यारोप से बहुत दूर है। वैसे मैं कार्टून फिल्में भी देखना पसंद करता हूं।

विदेश में नौकरी करने से पहले आपने कोलकाता में दो साल नौकरी की थी। यह शहर आपको याद आता है ?

सच कह रहा हूं इस शहर में मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। अब भी इस शहर में मेरे कुछ अच्छे दोस्त हैं, मौका मिलने पर उनसे मिलता हूं। कोलकाता में एक ऐसा अद्भुत चार्म है, जो दूसरे किसी शहर में नहीं है। फिर यहां के लोग काफी प्यार करने वाले होते है।

इस शहर की कौन-सी याद आपको सबसे ज्यादा कचोटती है ?

उस समय मेरी उम्र बहुत कम थी। धर्मतल्ला में स्थित एक छोटे-से दफ्तर में मैं काम करता था। दफ्तर में ही रहने का ठिकाना था। तब अक्सर चौरंगी के रास्ते के किनारे पैदल चलना बहुत अच्छा लगता था। उस समय मेरा ड्रेस होता था ट्रेकपैंट्स और टी शर्ट्स। सिर पर ढ़ेर सारा तेल चुपड़ा होता था। चौरंगी के मोड़ पर स्थित पहले दुकान पर रूक कर मैं रोज ब्रेकफास्ट करता था। उस समय काफी विदेशी पर्यटक वहां नाश्ता करते थे। जमकर नाश्ता करता था,पर जानते है कितने रुपए देने पडते थे, मात्र डेढ़ रुपए। आज भी बहुत इच्छा होती है कि इस दुकान में जाकर नाश्ता करूं।

आपकी फिटनेस का क्या राज है ?

मेरा फिटनेस मुख्य रूप से तीन बातों पर निर्भर है। वह है-योग,जॉगिंग और मार्शल आर्ट। इसके लिए मैं नियमित रूप से अच्छे फिटनेस ट्रेनर और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की परमार्श लेता रहता हूं। इसके बाद ही मैं अपना वर्कआउट तैयार करता हूं। अमूमन मैं अपने पूरे शरीर को प्राकृतिक तौर पर इस्तेमाल करता हूं। कहीं होटल में ठहरने पर मैं लिफ्ट का इस्तेमाल कम ही करता हूं। अपने कमरे तक सीढिय़ों से पहुंचने की कोशिश करता हूं। मैं जॉगिंग का मुरीद हूं। आज भी मेरी पूरी फिटनेस काफी हद तक जागिंग पर निर्भर है। अक्सर मैं छह सात किलोमीटर बहुत आसानी से चल लेता हूं। इसके लिए मैं कभी घड़ी की तरफ  नहीं देखता। कभी-कभी मौका मिलने पर मैं दिन में भी पैदल चल लेता हूं। बाकी मैं हफ्ते में पांच दिन रोज आधे या एक घंटे योगासन जरूर करता हूं। असल में शुरू से ही मैं फिटनेस को लेकर बहुत नियमबद्ध रहा हूं, इसीलिए इसके लिए मैं हमेशा टाइम निकाल लेता हूं। और हां,शरीर को ठीक रखने के लिए मैं कभी किसी भी तरह की दवाएं नहीं लेता।

क्या आप पर मोटापा कभी हावी हुआ है ?

जो लोग शुरू से ही अपनी फिटनेस को लेकर सजग रहते हैं, उनके लिए फिटनेस को मेंटेन करना आसन होता है। मैं सिक्स पैक या एइट पैक के बारे में कभी नहीं सोचता है और न ही बेवजह कमीज उतार कर अपने मसल्स को दिखाता हूं। बस,अपने अंदर यह आत्मविश्वास रखता हूं कि मेरा शरीर एकदम फिट है। सबसे अच्छी बात यह है कि किसी भी तरह के मोटापे को मैंने अपने पास फटकने नहीं दिया है। सामने से मुझे देखने पर मेरा जिस्म छरहरा ही दिखाई पड़ता है। वैसे भी हिंदी फिल्मों में नायक को हमेशा थोड़ा छरहरा रहना पड़ता है।

एक आखिरी सवाल, इस साल आप और क्या करना चाहते है ?

अभी जो-जो कर रहा हूं देखते जाइए, आगे से कुछ नहीं कहूंगा। इस साल के अंत में सफल होने पर सब कुछ बताऊंगा। इस साल भी मेरी बहुत सारी योजनाएं है,उनमें से पचास प्रतिशत भी सफल हो जाएं,तो मुझे खुशी होगी।



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