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सोमवार, 20 मई 2019

शौचालय और साफ पानी का लक्ष्य

सुरक्षित पेयजल और उपयुक्त स्वच्छता की पहुंच लोगों तक न होने से स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ता है

आइवरी कोस्ट (कोटे डी आइवर) में स्वच्छता और जल गुणवत्ता के संबंध में अधिकतर परेशानियों के लिए 2007 में समाप्त हुए गृह युद्ध को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इस संघर्ष ने, देश में महत्वपूर्ण जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। उसके बाद संघर्ष पुनर्निर्माण ने इस व्यवस्था के रखरखाव और उन्नत जल व स्वच्छता प्रणालियों की मरम्मत की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। आइवरी कोस्ट में 80 लाख से अधिक लोगों को पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे पानी से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। 40 लाख से अधिक लोगों की सुरक्षित पेयजल तक पहुंच नहीं है। जबकि ग्रामीण इलाकों में ये संख्या और बड़ी हो जाती है, जहां 46 प्रतिशत ग्रामीण आबादी की पहुंच साफ पानी तक नहीं है और 87 फीसदी लोग पर्याप्त स्वच्छता की पहुंच से दूर हैं।
आइवरी कोस्ट में पानी की गुणवत्ता के संकट के पीछे दो प्रमुख समस्याएं हैं। पहली, कई समुदायों, विशेष रूप से ग्रामीण लोगों को, न केवल सुरक्षित पेयजल तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, बल्कि पर्याप्त मात्रा में जितना पानी मिलना चाहिए वो भी नहीं मिल पा रहा है। दूसरी समस्या है, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर और स्नानगृह की, जो विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में भी पहुंचने में कई कठिनाइयों का सामना कर रही हैं। यह समस्या बहुमुखी है, और शहरी और ग्रामीण दोनों समुदायों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करती है।
यही समस्याएं दरअसल कालरा जैसी पानी की वजह से पैदा होने बीमारियों के संचरण का खतरा बढ़ा देती हैं। 2007 में ही जिसके उन्मूलन का दावा का किया जाता है, वह गिनी कृमि रोग भी यहां है। असुरक्षित पेयजल की वजह बाल मृत्यु दर बढ़ जाती है। वर्तमान में, कई बच्चे डायरिया और इसी तरह की अन्य बीमारियों से काल के गाल में समा जाते हैं। तेजी से शहरीकरण वर्तमान जल संकट के मुख्य कारणों में से एक है। गृह युद्ध के बाद, आइवरी कोस्ट की राजधानी यमौसौकोरो में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों का बड़े पैमाने पर आना हुआ। शहर में मौजूदा समस्याओं को बढ़ाते हुए, जनसंख्या में इस वृद्धि ने स्थिति और खराब कर दी। क्योंकि बढ़ी हुई जनसंख्या के लिए शहर में पर्याप्त कुएं या पर्याप्त सीवेज और स्वच्छता सुविधाएं नहीं हैं। 
जल संकट का असर शिक्षा पर भी पड़ता है। यूएसएआईडी के अनुसार, ‘स्कूल जाने से पहले पीने और नहाने के लिए पानी इकट्ठा करने के परिणामस्वरूप, पड़ोस के सभी बच्चे लगातार थके हुए और बीमार रहते थे, और इससे उनके अकादमिक प्रदर्शन पर बहुत असर पड़ता था।’ इसका सबसे बड़ा नुकसान लड़कियों को हुआ, जो मुख्य रूप अपने परिवारों के लिए पानी लाने का बोझ उठाती थीं। साथ ही जब वे किसी तरह स्कूल जाती थीं, तो उनके लिया स्वच्छता सुविधाएं नहीं होती थीं।
देश-दुनिया के कई संगठन, आइवरी कोस्ट में पानी की गिरती गुणवत्ता के संकट को दूर करने में जुटे हैं। चैरिटी वॉटर ने इससे निपटने के लिए देश में 190 अलग-अलग परियोजनाओं को वित्त पोषित किया है और नवंबर 2017 तक 1,146,687 डॉलर का निवेश कर चुकी है। यूनिसेफ जल और स्वच्छता ने भी एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण अपनाते हुए स्वच्छ पेयजल, सीधे समुदायों, स्कूलों और अस्पतालों को आपूर्ति कर रहा है। साथ ही स्वच्छता और स्वास्थ्यकर चीजों को बढ़ावा देते हुए, वह पानी से संबंधित बीमारियों को रोकने के लिए कम पानी की गुणवत्ता से महामारी संबंधी प्रभाव का सर्वेक्षण भी कर रहा है। 
शहरी जल आपूर्ति परियोजना का लक्ष्य जल गुणवत्ता को सुधारना और लोगों तक पानी की पहुंच बनना है। साथ ही शहरी जल आपूर्ति क्षेत्र में राष्ट्रीय जल एजेंसी की वित्तीय प्रबंधन और वित्तीय नियोजन क्षमता को मजबूत करना भी इसके लक्ष्य में शामिल है। 



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