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मंगलवार, 25 जून 2019

रीता भादुड़ी - ‘ये रातें नई पुरानी’

अभिनेत्री रीता भादुड़ी का अभिनय संसार सघन है। भले ही स्टार अभिनेत्री का तगमा उन्हें कभी नहीं मिला, पर उन्होंने बड़े से लेकर छोटे पर्दे तक खूब काम किया

कई बार लोग जीते-जी हमारी स्मृतियों में इस तरह दाखिल हो जाते हैं, जैसे उनका दौर पुराना रहा हो और वो हमें छोड़कर बहुत पहले चले गए हों। ऐसा ही हुआ अभिनेत्री रीता भादुड़ी के साथ। कहने को तो उनका निधन बीते माह ही हुआ पर उनके बारे में लोग या तो सोचना-बात करना बंद कर चुके थे या फिर उनकी याद भूले-भटके ही लोगों को आती थी। उनके करीबी लोगों से संपर्क किया तो पता चला कि उन्हें कई सालों से डायबिटीज थी, जिससे उनकी किडनियां ख़राब हो गई थीं। 
रीता जी से मेरी मुलाकात साल 2003-04 में दूरदर्शन के धारावाहिक ‘शिकवा’ के सेट पर पारिवारिक मित्र अलका आश्लेषा के जरिए हुई थी। अलका भी इस धारावाहिक में एक अहम किरदार निभा रही थीं। निर्माता-निर्देशक राकेश चौधरी के इस धारावाहिक की शूटिंग अंधेरी (पश्चिम) के मिल्लतनगर इलाके में स्थित पार्श्वगायिका हेमलता के बंगले में होती थी। रीता भादुड़ी के पिता रमेशचंद्र भादुड़ी तत्कालीन अंग्रेज सरकार में जागीरों के कमिश्नर थे और नौकरी के सिलसिले में उनका अधिकांश समय मध्य भारत की विभिन्न रियासतों में गुजरता था। लेकिन एक समय ऐसा आया कि स्थायित्व के लिए उन्हें इंदौर शहर में बस जाना पड़ा। रीता का जन्म 11 जनवरी 1950 को इंदौर में हुआ था। 3 बहनों और 1 भाई में वो सबसे छोटी थीं। बातचीत के दौरान रीता ने बताया था, ‘1950 के दशक के मध्य में हम लोग मुंबई घूमने आए। ये शहर हमें इतना पसंद आया कि 1957 में इंदौर छोड़कर हम मुंबई शिफ्ट हो गए। उस वक्त मेरी उम्र 7 साल थी। मुंबई आने पर मेरी मां चंद्रिमा भादुड़ी को हिन्दी पत्रिका ‘नवनीत’ में उप सम्पादिका की नौकरी मिल गई।’ 
मुंबई में बसे बंगाली परिवारों से संपर्क हुआ तो हम लोग दुर्गापूजा के दौरान होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी बढ़चढ़कर हिस्सा लेने लगे। ऐसे ही एक कार्यक्रम के दौरान हुए नाटक में उस ज़माने के मशहूर निर्देशकों नितिन बोस और विमल रॉय ने मेरी मां को अभिनय करते देखा तो उन्हें अपनी फिल्मों क्रमश: ‘नर्तकी’ और ‘बंदिनी’ में ले लिया। ये दोनों ही फिल्में 1963 में रिलीज हुई थीं। फिल्म ‘बंदिनी’ में जेल वार्डन के किरदार से मां को पहचान मिली और वो फिल्मों में व्यस्त होती चली गयीं। आगे चलकर उन्होंने ‘तीसरा कौन’, ‘रिश्ते-नाते’, ‘शराफत’, ‘सावन भादों’, ‘नन्हीं कलियां’, ‘लाल पत्थर’ और ‘आनंद आश्रम’ जैसी करीब 30 फिल्मों में काम किया।
मां की ही तरह रीता भादुड़ी का भी रूझान अभिनय की तरफ था। वह कॉलेज के जमाने से ही नाटकों में काम करती आ रही थीं। साल 1971 में उन्होंने फिल्म इंस्टिट्यूट, पुणे में दाखिला ले लिया, जहां पार्श्वगायक शैलेन्द्र सिंह, शबाना आजमी और कंवलजीत जैसे कलाकार उनके बैचमेट थे। दो साल का कोर्स पूरा करके रीता पासआउट हुईं तो जो पहली फिल्म उन्हें मिली, वो थी ‘आईना’। इस फिल्म के निर्देशक के.बालाचंदर और नायक-नायिका राजेश खन्ना और मुमताज थे। संगीत नौशाद का था। यह फिल्म 1974 में बनी थी।
उन्हीं दिनों फिल्म इंस्टिट्यूट के अपने एक बैचमेट मोहन शर्मा के जरिए रीता भादुड़ी की मुलाकात साउथ के जाने-माने निर्देशक सेतुमाधवन से हुई। उन्होंने रीता भादुड़ी को अपनी  मलयालम फिल्म ‘कन्याकुमारी’ की मुख्य भूमिका के लिए चुन लिया। इस फिल्म में रीता के हीरो कमल हासन थे। इसके बाद जब सेतुमाधवन ने अपनी मलयाली फिल्म ‘चट्टकारी’ पर हिंदी में ‘जूली’ बनाई तो उसकी एक अहम भूमिका रीता भादुड़ी को ऑफर की। रीता का कहना था, ‘इस फिल्म का गाना ‘ये रातें नई पुरानी, कहती हैं कोई कहानी’ मुझ पर फिल्माया गया था। लेकिन ‘जूली’ में मैंने बहन की भूमिका क्या की कि कैरेक्टर आर्टिस्ट ही बनकर रह गई। ‘उधार का सिन्दूर’, ‘प्रतिमा और पायल’, ‘अनुरोध’ जैसी कुछ फिल्मों में मैंने कैरेक्टर रोल्स किये। लेकिन अचानक ही कुछ ऐसा हुआ कि मैं गुजराती फिल्मों की टॉप की हिरोईन बन गई।’
अपने अभिनय सफर को लेकर आगे रीता भादुड़ी का कहना था, ‘तमाम व्यस्तताओं के बीच मेरे करियर ने अचानक ही एक नया मोड़ ले लिया। साल 1984 में निर्माता-निर्देशक राकेश चौधरी वडोदरा आकर मुझसे मिले। टी.वी. धारावाहिकों का दौर उस वक़्त अपने शुरुआती चरण में था। राकेश चौधरी ने मुझे दूरदर्शन धारावाहिक ‘बनते-बिगड़ते’ की एक अहम भूमिका ऑफर की। इस धारावाहिक से मैंने छोटे परदे पर एंट्री ली और फिर इस क्षेत्र में भी व्यस्त होती चली गई।
रीता भादुड़ी ने ‘खानदान’, ‘मुजरिम हाजिर’, ‘तारा’, ‘कुमकुम’, ‘संजीवनी’, ‘हद कर दी’, ‘एक महल हो सपनों का’, ‘भागोंवाली’, ‘एक नई पहचान’ जैसे बेशुमार टीवी धारावाहिकों में काम किया और इस तरह वो हर घर में एक जाना-पहचाना चेहरा बन गयीं। निधन के समय भी उनका धारावाहिक ‘निमकी मुखिया’ ‘स्टार भारत’ चैनल पर ऑन एयर था, जिसमें वो दादी की भूमिका निभा रही थीं। टी.वी के साथ साथ वो ‘युद्धपथ’, ‘बेटा’, ‘आतंक ही आतंक’, ‘घरजमाई’, ‘रंग’, ‘कभी हां कभी ना’, ‘राजा’ और ‘विरासत’ जैसी फिल्में भी करती रहीं।
रीता भादुड़ी के बारे में एक आम धारणा यह है कि वो जया भादुड़ी की बहन हैं। लेकिन ये बात बिल्कुल गलत है। हकीकत में अभिनेत्री रीता भादुड़ी का जया से कोई भी रिश्ता नहीं है। दरअसल जया भादुड़ी की बहन का नाम भी रीता है लेकिन वो एक अलग शख्सियत हैं। उनके पति अर्थात जया के बहनोई राजीव वर्मा एक जाने माने चरित्र अभिनेता हैं। जबकि स्वर्गीय अभिनेत्री रीता भादुड़ी अविवाहित थीं। इंटरनेट पर दी गई जानकारियों की संदिग्धता और अविश्वसनीयता का ज्वलंत उदाहरण स्वर्गीय अभिनेत्री रीता भादुड़ी के नाम का विकिपीडिया पेज है, जिसमें उनके बेटों के नाम (शिलादित्य वर्मा और तथागत वर्मा) तक दे दिए गए हैं। जाहिर है ये दोनों नाम अभिनेता राजीव वर्मा और उनकी पत्नी रीता भादुड़ी (जया की बहन) के बेटों के हैं।



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